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Fri. Feb 13th, 2026

छात्रों ने सुझाई एक ऐसी विधि कि अलार्म आपको बताएगा कि बैटरी में ‘फ्यूल’ भरिये

  • जीएलए के छात्रों का ‘बैटरी लेवल इंडिकेटर अलार्म‘ आइडिया का पेटेंट पब्लिश
  • जीएलए मैकेनिकल और कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र ने सझाया बैटरी लेवल तकनीक आइडिया

दैनिक उजाला, मथुरा : समय का अभाव और बार-बार देखने के झंझट को ध्यान में रखते हुए जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के मैकेनिकल विभाग छात्रों ने बैटरी के इलेक्ट्रोलाइट को लेकर एक आधुनिक विचार साझा किया है। छात्रों के इस विचार का पेटेंट भी पब्लिश हो गया है।

‘बैटरी लेवल इंडिकेट अलार्म‘ के तहत साझा किए गए विचार में मैकेनिकल विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र अभिषेक सक्सेना और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र हार्दिक कुलश्रेष्ठ ने टेक्नोलॉजी बिजनेस इंक्यूबेटर के कॉर्डिनेटर जितेन्द्र कुमार के दिशा-निर्देशन में एक ऐसी तकनीक विकसित करने का शानदार विचार पेश किया, जो घरों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी के इलेक्ट्रोलाइट को स्तर कम होने पर व्यक्ति को अलार्म नोटिफिकेशन मिल जाएगा। इससे मदद मिलेगी कि हमें बैटरी में इलेक्ट्रोलाइट भरने की आवश्यकता कब है।

छात्रों ने अपने घर का अनुभव और अन्य लोगों की चिंता को देखते हुए बताया कि घरों में बैटरी का उपयोग करते समय हम अक्सर भूल जाते हैं कि पावर कटऑफ के दौरान बिजली के उपकरणों को चलाने के लिए बैटरी में कितना इलेक्ट्रोलाइट बचा है। इलेक्ट्रोलाइट की कमी के कारण ही बैटरी का जीवन भी कम हो जाता है। ऐसे में यह अलार्म नोटिफिकेशन उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है। छात्रों ने बताया कि इसमें विभिन्न प्रकार के सेंसर का उपयोग किया है, जैसे फ्लोट लेवल सेंसर जो कि बैटरी में इलेक्ट्रोलाइट के स्तर को मापने का कार्य करेगा। माइक्रोकंट्रोलर जो इस आविष्कार में मस्तिष्क के रूप में कार्य करेगा। बजर का उपयोग अलार्म देने के लिए किया गया है। इसके अलावा कई अन्य जो इस परियोजना को बड़ी दक्षता के साथ सफल बनाते हैं।

जीएलए के डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया कि बैटरी स्तर संकेतक अलार्म उपयोगकर्ताओं को शेष बैटरी जीवन के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे वे तदनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बना सकते हैं। यह अचानक बिजली की रुकावट और असुविधा को रोकता है।

कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के डीन प्रो. अशोक भंसाली एवं मैकेनिकल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पियूष सिंघल ने बताया कि इन सुविधाओं के संयोजन से आविष्कार उपयोगकर्ताओं को अपनी बैटरी को सक्रिय रूप से प्रबंधित करने का अधिकार देता है। संकेतक बैटरी की चार्ज स्थिति के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को संभावित समस्याओं के होने से पहले उनका अनुमान लगाने की अनुमति मिलती है। जब बैटरी का स्तर एक महत्वपूर्ण बिंदु तक पहुंचता है, तो अलार्म सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जो उपयोगकर्ताओं को बैटरी को रिचार्ज करने जैसी समय पर कार्रवाई करने के लिए सचेत करता है।

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