नई दिल्ली : कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने चंदा वसूलने के लिए ED-CBI जैसी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया है। इसलिए मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की जानी चाहिए। शुक्रवार (23 फरवरी) को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया से कहा कि 2018-19 और 2022-23 के बीच भाजपा को लगभग 335 करोड़ रुपए का दान देने वाली कम से कम 30 कंपनियों को केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
जयराम रमेश ने बताया कि केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि तीन में से दो एजेंसियां वित्त मंत्रालय के अधीन हैं, पूरा देश जानता है कि सरकार जांच एजेंसियों को रिमोट कंट्रोल से चला रही है। 2014 के बाद से राजनेताओं के खिलाफ ED के मामलों में चार गुना बढ़ोतरी इस बात का सबूत है। इनमें से 95% केस विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं।
पिछले दिनों भाजपा की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई थी, जिससे पता चला था कि BJP की कुल इनकम 2022-23 में ₹2,361 करोड़ हो गई है। जो 2021-22 में ₹1,917 करोड़ थी।
वित्त मंत्री से पूछे गए कांग्रेस के 3 सवाल
क्या सरकार भाजपा के फाइनेंस पर व्हाइट पेपर लाएगी। इनमें सोर्स के साथ-साथ यह भी बताया जाए कि कैसे कॉर्पोरेट कंपनियों को जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके दान देने के लिए मजबूर किया गया था।
अगर आप कुछ छिपा नहीं रहे हैं तो क्या आप यह बता सकते हैं कि किस समय, किन कारणों से भाजपा का खजाना भर गया। क्या आप उन घटनाओं के पॉइंट टू पॉइंट खंडन पेश कर सकते हैं।
अगर आप स्पष्टीकरण नहीं दे सकते हैं, तो क्या आप इन संदिग्ध सौदों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के लिए तैयार हैं।
6 कंपनियों ने चंदा देने से इनकार किया तो छापा पड़ा
वेणुगोपाल ने कहा कि 30 कंपनियों में से 23 कंपनियां जिन्होंने भाजपा को कुल 187.58 करोड़ रुपए दिए थे, उन्हीं कंपनियों ने 2014 से छापा पड़ने के बीच कभी भी कोई राशि दान नहीं की थी। इनमें से कम से कम 4 कंपनियों ने सेंट्रल एजेंसी के दौरे के चार महीने के अंदर ही कुल 9.05 करोड़ रुपए का दान दिया।
इनमें से 6 कंपनियां, जो पहले से ही भाजपा को डोनेशन देती थीं, उन्हें दान देने से इनकार करने के बाद जांच का सामना करना पड़ा। तलाशी के बाद के महीनों में इन्हीं कंपनियों ने पार्टी को बड़ी रकम सौंपी।

