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छेड़छाड़ के आरोपी को तीन वर्ष की सजा व 14 हजार 400 का अर्थदंड

मथुरा : विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय जज रामकिशोर की अदालत ने गुरुवार को नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोप में अभियुक्त हरवीर उर्फ चिलुआ को दोषी मानते हुए तीन वर्ष का कारावास व 14 हजार 400 रुपए के अर्थदंड का फैसला सुनाया है।

इस केस की सरकार की ओर से पैरवी कर रही स्पेशल डीजीसी पॉक्सो कोर्ट श्रीमती अलका उपमन्यु ने बताया कि पीड़िता के पिता ने थाना मगोर्रा में तहरीर दी थी जिसमें कहा गया था कि उसके तीन बच्चे है जिनमें पीडिता सबसे बड़ी है जिसकी उम्र 15 वर्ष है, उसे मेरा पडौसी हरवीर उर्फ चिलुआ आये दिन तंग व परेशान करता है और अकेला पाकर नंगा हो जाता है और उसे अश्लील इशारे करता है। इस संबंध में कई बार हरवीर उर्फ चिलुआ के परिवारीजनो से कहा तो उन्होने कहा कि हम उसे समझा देंगें।

3 सितम्बर 2021 को जब प्रार्थी की पत्नी, जो कि गूंगी व बहरी है, बच्चो के साथ घर में सो रही थी तो रात्रि करीब 02.30 बजे हरवीर उर्फ चिलुआ छत के रास्ते से घर के अन्दर घुस आया और उसकी नाबालिग पुत्री को गलत नीयत से पकड लिया। उसने हल्ला मचाया तो उसके छोटे भाई व बहन जाग गये। मां के विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की और मेरे बेटे उम्र करीब 08 वर्ष की गर्दन पर चाकू रख दिया और कहने लगा कि हल्ला किया तो इसकी गर्दन काट दूँगा। इस बात को सुनकर सभी शान्त हो गये और वह आसानी से छत के ही रास्ते से भाग गया। वादी मुकदमा की उपरोक्त तहरीर के आधार पर थाना-मगोर्रा, जिला मथुरा पर अभियुक्त हरवीर के विरूद्ध मुकदमा अपराध संख्या 180/2021, अन्तर्गत धारा 452, 354 क, 323, 506 भारतीय दण्ड संहिता व 7/8 पोक्सो एक्ट में दिनांक 13.09.2021 को ही पंजीकृत किया गया।

गुरुवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट रामकिशोर यादव की अदालत ने अभियुक्त हरवीर उर्फ चिलुआ को अन्तर्गत धारा-323 भारतीय दण्ड संहिता के अपराध हेतु 01 वर्ष के कारावास तथा पांच सौ रूपये के अर्थदण्ड, धारा-341 भारतीय दण्ड संहिता के अपराध 01 माह के कारावास तथा पांच सौ रूपये के अर्थदण्ड, धारा-452 भारतीय दण्ड संहिता के अपराध हेतु 03 वर्ष के कारावास तथा दस हजार रूपये के अर्थदण्ड, धारा-506 भारतीय दण्ड संहिता के अपराध हेतु अभियुक्त 01 वर्ष के कारावास तथा चार सौ रूपये के अर्थदण्ड, धारा 8 में अभियुक्त हरवीर उर्फ चिलुआ को 03 वर्ष के कारावास तथा तीन हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है।अर्थदण्ड न देने पर अभियुक्त अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतेगा। अभियुक्त द्वारा जेल में बितायी गयी अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी।

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