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लोकसभा चुनाव 2024 के लिए स्याही तैयार, इतने करोड़ का आया खर्च, जानिए पिछले चुनाव से कितनी बड़ी कीमत

नई दिल्ली : देश में लोकतंत्र की किस्मत जिस अमिट स्याही से लिखी जाती है और जिस स्याही का रंग उंगली पर लगने के बाद देश के मतदाता नई सत्ता का रंग तय करते हैं, उस स्याही को बनाने वाली मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड (एमपीवीएल) ने देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसकी आपूर्ति कर दी है। एमपीवीएल, कर्नाटक सरकार का उपक्रम है और वर्ष 1962 से ही चुनाव आयोग के लिए इस स्याही का निर्माण कर रहा है। देश में सर्वाधिक 80 संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश में हैं, स्याही की सबसे बड़ी खेप की आपूर्ति उत्तर प्रदेश को ही की गई है। गहरा बैंगनी निशान छोड़ने वाली स्याही बाएं हाथ की तर्जनी पर इसलिए लगाई जाती है ताकि एक मतदाता द्वारा एक से अधिक मतदान को रोका जा सके। लोकसभा चुनाव के लिए मतदान 19 अप्रेल से लेकर 1 जून तक सात चरणों में होना है।

वर्ष स्याही का मूल्य शीशियों की संख्या (लगभग) बढ़ोतरी
2024 55 करोड़ रुपए 26.55 लाख 2.2 प्रतिशत
2019 36 करोड़ रुपए 25.98 लाख
वर्ष मतदाता सर्वाधिक आपूर्ति

उत्तर प्रदेश 2024 15.30 करोड़ 3.58 लाख शीशियां
उत्तर प्रदेश 2019 14.59 करोड़ 3.64 लाख शीशियां

वर्ष मतदाता सबसे कम आपूर्ति
लक्षद्वीप 2024 57,500 110
लक्षद्वीप 2019 55,057 125

97 करोड़ हैं भारत में मतदाता देश में (जनवरी तक)

10 मिलीग्राम की शीशी काम आती है, 700 लोगों की उंगलियों पर निशान लगाने के लिए लगभग
1,500 (लगभग) मतदाता औसत प्रति मतदान केंद्र
12 लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे
25 से अधिक देशों को होता है स्याही का निर्यात

राज्य शीशियों की आपूर्ति

महाराष्ट्र 2.68 लाख
पश्चिम बंगाल 2 लाख
बिहार 1.93 लाख
तमिलनाडु 1.75 लाख
तेलंगाना 1.50 लाख
मध्य प्रदेश 1.52 लाख
कर्नाटक 1.32 लाख
राजस्थान 1.30 लाख
आंध्र प्रदेश 1.16 लाख
गुजरात 1.13 लाख
केरल 63,000
पंजाब 55,000
हरियाणा 42,000
दिल्ली 35,000
जम्मू-कश्मीर 30,000
झारखंड 75,380
हिमाचल प्रदेश 22,000
मणिपुर 8,000
चंडीगढ़ 1,500
गोवा 5,000

मार्कर पैन लाने का प्रयास

कंपनी पारंपरिक शीशी के स्थान पर विकल्प के तौर पर मार्कर पैन विकसित करने के लिए प्रयासरत है।

पिछले चुनाव में बढ़ी थी कीमत

अमिट स्याही बनाने में इस्तेमाल होने वाले महत्त्वपूर्ण घटक सिल्वर नाइट्रेट की कीमत में उतार-चढ़ाव के चलते पिछले चुनाव में ही एक शीशी पर आने वाली लागत 160 रुपए से बढ़कर 174 रुपए हो गई थी।

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