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Fri. Feb 13th, 2026

पतंजलि विज्ञापन केस में रामदेव-बालकृष्ण का माफीनामा खारिज:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जानबूझकर हमारे आदेश की अवमानना की, कार्रवाई के लिए तैयार रहें

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पतंजलि के विवादित विज्ञापन केस में बाबा रामदेव और बालकृष्ण के दूसरे माफीनामे को भी खारिज कर दिया। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच ने पतंजलि के वकील विपिन सांघी और मुकुल रोहतगी से कहा कि आपने जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

इससे पहले 2 अप्रैल को इसी बेंच में हुई सुनवाई के दौरान पंतजलि की तरफ से माफीनामा दिया गया था। उस दिन भी बेंच ने पतंजलि को फटकार लगाते हुए कहा था कि ये माफीनामा सिर्फ खानापूर्ति के लिए है। आपके अंदर माफी का भाव नहीं दिख रहा। इसके बाद कोर्ट ने 10 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की थी।

सुनवाई से ठीक एक दिन पहले 9 अप्रैल को बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने नया एफिडेविट फाइल किया। जिसमें पतंजलि ने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि इस गलती पर उन्हें खेद है और ऐसा दोबारा नहीं होगा।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पतंजलि के खिलाफ याचिका लगाई है

सुप्रीम कोर्ट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की ओर से 17 अगस्त 2022 को दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें कहा गया है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ निगेटिव प्रचार किया। वहीं खुद की आयुर्वेदिक दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का झूठा दावा किया।

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(डॉक्टर मिथिलेश कुमार हाजिर हुए।)

जस्टिस अमानतुल्लाह: आप पोस्ट ऑफिस की तरह काम कर रहे थे? आपके पास यह सब कहने की हिम्मत है?

जस्टिस हिमा कोहली: आपका कोई वकील है?

जस्टिस अमानतुल्लाह: आपके लिए यह शर्मनाक है।

जस्टिस हिमा कोहली: किस बुनियाद पर आपने यह कहा। किसने आपसे कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्रग और मैजिक रेमिडीज एक्ट पर रोक लगा दी। कबसे हैं आप इस पोस्ट पर। आपके भीतर कोई संशय था तो आपने किस विभाग से सलाह ली?

जस्टिस कोहली: हम यह क्यों ना मानें कि आपकी मिलीभगत नहीं थी। बताइए सारे लेटर आपकी ओर से गए हैं।

डॉक्टर कुमार: ये हमारे आने से पहले का काम है।

जस्टिस हिमा कोहली: कोई मरे तो मरे, हम वही करेंगे।

जस्टिस अमानतुल्लाह: आपको भी अपराधी माना जाएगा। अभी तो यह शुरुआत है।

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ध्रुव मेहता ने जवाब पढ़ना शुरू किया।

जस्टिस हिमा कोहली: अगर आप हिंदी को लेकर असहज हैं तो अपने साथी से कहिए कि वो पढ़े। अंग्रेजी में यह अपना भाव खो रहा है।
वंशजा शुक्ला ने जवाब पढ़ना शुरू किया।

जस्टिस कोहली: आप हमारे आदेशों का इंतजार कर रहे थे।

जस्टिस अमानतुल्लाह: राज्य सरकारें लीगल एक्सपर्ट के सहारे ऐसा नहीं कर सकती हैं। अगर ऐसे जवाब स्वीकार कर लिए गए तो सुप्रीम कोर्ट का मजाक बन जाएगा।

जस्टिस हिमा कोहली: सरकार और अफसर साथ मिले हुए थे।

जस्टिस अमानतुल्लाह: सरकार को ऐसा अफसर नियुक्त करना चाहिए, जो इन सबसे जुड़ा हुआ ना हो।

जस्टिस हिमा कोहली: जिसने जवाब दिया था, वो अफसर कहां है।

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जस्टिस हिमा कोहली: मिस्टर मेहता (उत्तराखंड सरकार के वकील) आपने जानबूझकर अपनी आंखें बंद रखीं। आपने जो लेटर बताया, उसे पढ़िए। क्या लिखा है उसमें। आपने कहा कि इन कंपनियों ने दवाएं बनाई हैं। आपने लिखा कि विज्ञापन केवल सांकेतिक हैं। वो आपकी नाक के नीचे ऐसा करते कहे, उन्होंने कहा कि विज्ञापन सांकेतिक है और आपने मान लिया! उन्होंने कहा कि उनका मकसद लोगों को आयुर्वेद से जोड़ना नहीं है। ऐसा लग रहा था कि वो पहले आदमी हैं, जिनके पास आयुर्वेदिक दवाएं हैं।

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जस्टिस खान: अफसरों को सहारा देना, हम इसे हल्के में नहीं लेंगे।

जस्टिस हिमा कोहली: देखिए किस तरह से अफसर सिर्फ बैठे रहे और फाइलें खिसकाते रहे।

जस्टिस खान: अफसरों के खिलाफ सख्त एक्शन लेना चाहिए।

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उत्तराखंड सरकार से जस्टिस हिमा कोहली: हां ध्रुव मेहता, अफसर फाइलें खिसकाने के अलावा क्या करते रहे।

जस्टिस अमानतुल्लाह खान: अभी जवाब दीजिए।

ध्रुव मेहता: बॉम्बे हाई कोर्ट का एक ऑर्डर है।
जस्टिस खान: उसका यहां कोई आधार नहीं है।

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उत्तराखंड सरकार की ओर से ध्रुव मेहता और वंशजा शुक्ला ने एफिडेविट पढ़ा।

सुप्रीम कोर्ट: हम आपको भी मुक्त नहीं करेंगे। केंद्र से खत आता है कि आपके पास मामला है। कानून का पालन कीजिए। 6 बार ऐसा हुआ। बार-बार लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर चुप रहे। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जो आए, उन्होंने भी यही किया। तीनों अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए।

जस्टिस हिमा कोहली: यह लापरवाही का मामला नहीं है, यह दिखाता है कि ड्रग ऑफिसर ने काम कैसे किया। उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए।

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मुकुल रोहतगी: हमने कहा कि बिना शर्त माफीनामा है। मैंने उन्हें (रामदेव-पतंजलि) को भी बताया था।

सुप्रीम कोर्ट: लेकिन हम संतुष्ट नहीं है। आपको गलत नहीं ठहरा रहे हैं।

रोहतगी: कृपया अगले हफ्ते सुनवाई कीजिए।

सुप्रीम कोर्ट: क्यों? यहां वो लोग गलत हैं। समाज में संदेश जाना चाहिए कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन ना हो। ये सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है, यह कानून के उल्लंघन का मामला है। अपने जवाब देख लीजिए। जब राज्य सरकार ने आपसे विज्ञापन वापस लेने के लिए कहा तो आपने दलील दी थी कि हाईकोर्ट ने किसी भी एक्शन पर रोक लगा रखी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जब रामदेव और बालकृष्ण को पता चल गया कि वो गलत हैं, इसके बाद उन्होंने दस्तावेज पर माफीनामा दिया। हम इस माफीनामे को स्वीकार करने से इनकार करते हैं। हम मानते हैं कि जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी: यहां दो एफिडेविट हैं। एक पतंजलि का और दूसरा उसके MD का। हम बिना शर्त माफी मांगते हैं, आगे कोई गलती नहीं होगी। हमारा इरादा आदेश का उल्लंघन करने का नहीं था।

जस्टिस हिमा कोहली: कंटेम्पट के मामले में आपको राहत चाहिए, आप कह रहे हैं कि आपको विदेश जाना है, टिकट है और फिर आप कहते हैं। आप प्रक्रिया को बहुत हल्के में ले रहे हैं।​​​​​​​

मुकुल रोहतगी: टिकट दस्तावेजों में है। ये अगले दिन आया था।

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SG तुषार मेहता: मेरी वकील साहब को सलाह है कि माफी बिना शर्त होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट: इन लोगों को सिफारिशों पर भरोसा नहीं है। मुफ्त की सलाह हमेशा ऐसे ही ली जाती है। हम एपिडेविट से संतुष्ट नहीं हैं।
केस में लगाई एक और याचिका को बेंच ने देखा।
कोर्ट ने पूछा: आप कौन हैं?

याचिकाकर्ता के वकील: मुअक्किल की मां का किडनी का इलाज हुआ था।

कोर्ट: हम इससे ज्यादा जरूरी चीज देख रहे हैं, पब्लिसिटी के लिए बीच में मत कूदिए।

जस्टिस हिमा कोहली: इस याचिका का कोई आधार नहीं है। हम इसे खारिज कर देंगे। 5 साल तक आप बैठे रहे। हमें आपकी सहायता नहीं चाहिए। हम इसे खारिज करते हैं और 10 हजार जुर्माना लगाते हैं।

याचिकाकर्ता: हमें इसे वापस लेने की इजाजत दीजिए।

जस्टिस हिमा कोहली: आपको पहले दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए था।

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