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Fri. Feb 13th, 2026

शिवराज बोले- भारत दुनिया का फूड बास्केट बनेगा:केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा- लखपति दीदी के बाद बहनों को मिलेनियम दीदी बनाएंगे

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया का फूड बास्केट बनाना है। इस दिशा में लगातार काम हो रहा है। हमारे वैज्ञानिकों के पास जो रिसर्च और टेक्नोलॉजी है, इससे हम उत्पादन बढ़ाकर जल्द दूसरे देशों का पेट भरने में सक्षम होंगे।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कृषि, ग्रामीण विकास और राजनीति पर विस्तृत चर्चा की। भाजपा अध्यक्ष की दौड़ में नाम को लेकर वे कहते हैं कि अभी किसान और गांव ही चित में हैं और वर्तमान में ही जीता हूं।

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा हैं। 70% भारत गांव में बसता है। कृषि के बिना विकसित भारत बन ही नहीं सकता। विगत 11 वर्षों में कृषि में क्रांति हुई है। बुधवार को ही कैबिनेट ने धन-धान्य योजना को मंजूरी दी l दस साल में कृषि में 40% से ज्यादा उत्पादन बढ़ा है। दूध में 1966-80 में 0.9 मिलियन टन सालाना वृद्धि थी, जो 2014-24 में 10.2 मिलियन टन हो गई। 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 3,309 लाख टन पहुंचने की संभावना है।

इस बातचीत से कुछ देर पहले (बुधवार को) ही कैबिनेट ने ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ को मंजूरी दी, जो 2025-26 से 6 वर्ष तक 100 जिलों में लागू होगी। यह केवल योजना नहीं, अन्नदाताओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम है। किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेंगे। यह योजना उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई बेहतर करने, भंडारण की मजबूत व्यवस्था बनाने और किसानों को सहूलियत से कर्ज उपलब्ध कराने के लक्ष्य से शुरू की जा रही

किसान हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैंl किसानों की आर्थिक सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा प्रतिबद्धता है। उनके हित से कोई समझौता नहीं होगा।

केमिकल फर्टिलाइजर व पेस्टीसाइड के अनियंत्रित व असीमित उपयोग से माटी की सेहत खराब हो रही है। प्राकृतिक कृषि मिशन लॉन्च किया है। एक करोड़ किसानों तक जाएंगे और आने वाले खतरों से अवगत कराएंगे। प्राकृतिक खेती के लिए उन्हें ट्रेनिंग देंगे। बायो रिसोर्स प्राप्त करने के लिए सेंटर बनाएंगे। आवश्यक चीजों के लिए अनुदान देंगे। अभी 18 लाख किसानों से प्राकृतिक खेती कराने का लक्ष्य है। हम 7.5 लाख हेक्टेयर से शुरूआत करेंगे। मैं खुद भी दो एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती कर रहा हूं।

जीनोम एडिटिंग में कहीं बाहर से वायरस या बैक्टीरिया का जीन नहीं लिया जाता। उसी बीज पर प्रयोग करते हैं। यह सुरक्षित है। चावल की किस्में कमला व डीएसटी राइस-1में 20 से 30% तक उत्पादन बढ़ गया है। फसल की समयावधि घट गई। पानी कम लगेगा और लागत बचेगी। वैसे बीज तीन साल में बदल देना चाहिए। एक बीज से फसलें बार-बार बोने से गुणवत्ता घटती है। उत्पादन अच्छा नहीं होता। अभी 60 के दशक का कानून है, जिसमें घटिया खाद, पेस्टीसाइड, बीज पर सिर्फ जुर्माना होता है। नया एक्ट लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें आर्थिक दंड के साथ कठोर सजा का प्रावधान होगा।

भारत को ‘दुनिया का फूड बास्केट’ बनाने की रणनीति है

एक समय था कि हम अमेरिका का पीएल-480 लाल गेहूं खाने को विवश थे। आज हमारे पास सरप्लस है। 50 हजार करोड़ का बासमती निर्यात कर रहे हैं। दुनिया के कई देशों में हम चावल समेत कई कृषि वस्तुओं का निर्यात कर रहे हैं। लगातार इसे बढ़ाएंगे। हमारे वैज्ञानिकों के पास जो रिसर्च और तकनीक है, इससे हम उत्पादन बढ़ाकर दूसरे देशों का भी पेट भरेंगे।

कृषि भूमि कम होते जाने की चुनौती

कृषि में आधुनिक तकनीक आ रही है। कृषि में हाइड्रोपोनिक पद्धति पर जोर देना होगा। इससे कई लेयर में खेती हो सकेगी। कम जमीन पर ज्यादा खेती कर सकते हैं। बागवानी और जैविक खेती की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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