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जीएलए बायोटेक की रिसर्च स्कॉलर को अमेरिका से मिली विज़िटर स्टूडेंट फेलोशिप

  • जीएलए बायोटेक रिसर्च स्कॉलर मल्टीपल मायलोमा पर करेंगी शोध, कैंसर उपचार की दुनिया को मिलेगी नई दिशा

दैनिक उजाला, मथुरा : शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाईयां छूता जीएलए विश्वविद्यालय, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित हुआ है। विश्वविद्यालय की एमएससी बायोटेक्नोलॉजी विभाग की अल्यूमना एवं वर्तमान में पीएचडी स्कॉलर स्वधा पाण्डेय ने वैश्विक शोध जगत में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के मेडिकल कॉलेज ऑफ विस्कॉन्सिन से प्रतिष्ठित जे-1 एक्सचेंज विज़िटर स्टूडेंट रिसर्च फेलोशिप प्राप्त हुई है।

यह फेलोशिप उन्हें मल्टीपल मायलोमा, जो कि एक गंभीर रक्त कैंसर पर चिकित्सकीय शोध के लिए प्रदान की गई है। अमेरिका में वह एमसीडब्लू यूएसए के प्रो. दीपक पराशर और प्रो. सिगफ्रीड जान्ज के निर्देशन में सीएलपीटीएम1एल नामक प्रोटीन की कैंसर में भूमिका तथा कीमोथेरेपी की प्रभावशीलता को बढ़ाने संबंधी अध्ययन करेंगी।

स्वधा का यह शोध एक ऐसी दिशा में अग्रसर है, जहां कीमोथेरेपी रेजिस्टेंस जैसी चुनौती से निपटने में विज्ञान को नई शक्ति मिल सकती है। उनका उद्देश्य है कैंसर कोशिकाओं में इस विशेष जीन और प्रोटीन की भूमिका को समझते हुए, रोगियों के उपचार को अधिक प्रभावी और लक्ष्य-निर्देशित बनाना।

रिसर्च स्कॉलर की इस ऐतिहासिक सफलता पर जीएलए के पीएचडी गाइड डा. सौरभ गुप्ता, डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने रिसर्च स्कॉलर को बधाई देते हुए कहा कि “यह उपलब्धि स्वधा पाण्डेय की अदम्य लगन, शोध के प्रति समर्पण और वैज्ञानिक सोच की परिचायक है। यह न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए मील का पत्थर है, बल्कि जीएलए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध परंपरा की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि करती है।“

जीएलए बायोटेक्नोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह ने कहा कि “बायोटेक्नोलॉजी आज केवल एक विषय नहीं, बल्कि 21वीं सदी की सबसे क्रांतिकारी और परिवर्तनकारी वैज्ञानिक दिशा है। यह वह क्षेत्र है, जहां तकनीकी, अनुसंधान और नवाचार मिलकर मानव जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कार्य करते हैं। चाहे वह कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज हो या पर्यावरण संरक्षण, कृषि में सुधार, औषधीय खोज या खाद्य सुरक्षा, बायोटेक्नोलॉजी हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है।”

बायोटेक्नोलॉजी विभाग इस सोच के साथ भी कार्य करता है कि छात्रों को रिसर्च, एक्सपेरिमेंटेशन और इंटरनेशनल एक्सपोज़र का ऐसा मंच दें जहां वे वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकें। आज जब हमारी छात्रा स्वधा पाण्डेय को अमेरिका के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज ऑफ विस्कॉन्सिन से फेलोशिप प्राप्त हुई है, तो यह हमारे इसी विजन की पुष्टि है। ज्ञात रहे कि बायोटेक विभाग को इन ऊंचाईयां तक पहुंचाने में विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह के अथक प्रयास से संभव हो पाया है।

विश्वविद्यालय का शोध-आधारित वातावरण, उन्नत प्रयोगशालाएं

जीएलए के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय का शोध-आधारित वातावरण, उन्नत प्रयोगशालाएं, विशेषज्ञ फैकल्टी, और इंडस्ट्री-एकेडेमिक सहयोग के माध्यम से हम विद्यार्थियों को ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान कर रहे हैं, जहां से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें। हमारा सपना है कि हर छात्र अपने ज्ञान से समाज में बदलाव लाए और बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, सुरक्षित और उन्नत भविष्य का निर्माण करे। यह फेलोशिप जहां स्वधा के करियर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाइयां देगी, वहीं जीएलए विश्वविद्यालय को भी वैश्विक शैक्षणिक और शोध संस्थानों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।

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