जम्मू-कश्मीर : जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के चसोटी गांव में 14 अगस्त की दोपहर 12.30 बजे बादल फटा। कई लोग पहाड़ से आए पानी और मलबे की चपेट में आ गए। हादसे में अब तक 52 लोगों की मौत हो गई है। 21 शवों की पहचान की जा चुकी है। अब तक 167 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 38 की हालत गंभीर है। करीब 100 से ज्यादा लोग लापता हैं।
हादसा उस समय हुआ जब हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा के लिए किश्तवाड़ में पड्डर सब-डिवीजन में चसोटी गांव पहुंचे थे। यह यात्रा का पहला पड़ाव है। बादल वहीं फटा है, जहां से यात्रा शुरू होने वाली थी। यहां श्रद्धालुओं की बसें, टेंट, लंगर और कई दुकानें थीं। सभी बाढ़ में बह गए।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस त्रासदी के मंजर डराने वाले हैं। मलबे में कई शव खून से सने थे। फेफड़ों में कीचड़ भर गया था। टूटी पसलियां और अंग बिखरे पड़े थे। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और पुलिस ने घायलों को घंटों मशक्कत के बाद कीचड़ भरे इलाके से खोदकर अपनी पीठ पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया।
चसोटी किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर और मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पहला गांव है। यह जगह पड्डर घाटी में है, जो 14-15 किलोमीटर अंदर की ओर है। इस इलाके के पहाड़ 1,818 मीटर से लेकर 3,888 मीटर तक ऊंचे हैं। इतनी ऊंचाई पर ग्लेशियर (बर्फ की चादर) और ढलानें हैं, जो पानी के बहाव को तेज करती हैं।
मचैल माता तीर्थयात्रा हर साल अगस्त में होती है। इसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं। यह 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलेगी। यह रूट जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी लंबा है और इसमें पड्डर से चशोटी तक 19.5 किमी की सड़क पर गाड़ियां जा सकती हैं। उसके बाद 8.5 किमी की पैदल यात्रा होती है।
आपदा की तस्वीरें…

ये बादल फटने के बाद चशोटी गांव का फुटेज है। ऊपर से बाढ़ के साथ मलबा नीचे आया।

चशोटी गांव में गुरुवार को बादल फटने के बाद मलबे में कई घर बह गए।

बादल फटने के बाद इलाके की तस्वीर। कई घरों को नुकसान पहुंंचा।

हादसे में घायल लोग, उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में लाया गया

हादसे में मारे गए लोगों के शव एंबुलेंस और अन्य वाहनों में ले जाए जा रहे हैं।
NDRF की टीम सर्च-रेस्क्यू के लिए पहुंची
नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स (NDRF) की एक टीम शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चोशिती गांव पहुंची।
किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर पंकज शर्मा ने बताया-NDRF की टीम गांव में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई है। NDRF टीम गुरुवार देर रात गुलाबगढ़ पहुंच गई थी। हालांकि, खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर नहीं चल सका, इसलिए टीम उधमपुर से सड़क मार्ग से आई।
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि दो और टीमें रास्ते में हैं। वे भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होंगे। राष्ट्रीय राइफल्स के जवान भी ऑपरेशन में शामिल हो गए हैं।डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि 60-60 जवानों वाली पांच सैन्य दल, कुल 300 जवान, व्हाइट नाइट कोर की मेडिकल टीम, पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर लोगों की जान बचाने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रयास कर रही हैं।
बादल फटने की तस्वीरें…

चशोटी गांव में बादल फटने के बाद स्थानीय लोगों ने घायलों को रेस्क्यू किया।

लोगों को हादसे वाली जगह से फौरन सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
पहाड़ की ढलान पर थे घर, लोगों के सामने सब बह गए
चशोटी गांव नियंत्रण रेखा के करीब है। करीब 150 घर और 700 लोग रहते हैं। यह मचैल माता मंदिर का पहला पड़ाव है। इस सालाना यात्रा में हजारों लोग आते हैं। इस बार यात्रा 25 जुलाई से यात्रा चल रही है, जो 5 सितंबर तक चलनी थी। गुरुवार को भी काफी यात्री पहुंचे थे। स्थानीय नागरिक मोहन लाल ने बताया कि पास ही लंगर चल रहा था और टेंट लगे हुए थे।
दोपहर करीब 12 बजे करीब दो किमी ऊपर पहाड़ पर बादल फटा और कुछ ही मिनट में वहां से बाढ़ के रूप में सैलाब आया। हम लोकल हैं, इसलिए आपदा को भांप गए और चिल्लाकर लोगों से दूर जाने को कहने लगे। उस वक्त लोग मंदिर के रास्ते पर लाइन लगाकर खड़े थे। तभी बाढ़ पहाड़ से उतरकर नीचे आ गई। चंद सेकंड में पूरा इलाका साफ हो गया। लोगों को संभलने का भी मौका नहीं मिला।

