- जीएलए में पहले दिन एक साथ ऑडिटोरियम में जुटे नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं
दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने सोमवार का दिन एक महापर्व के रूप में मनाया। कारण था विश्वविद्यालय परिवार में नव प्रवेशित विद्यार्थी एक साथ एक ऑडिटोरियम में दीक्षारंभ ‘ऑरिएंटेशन‘ कार्यक्रम के माध्यम से शामिल हुए। कार्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों को प्रदान की जाने वाली शिक्षा और रोजगार के बारे में जानकारी दी।
ऑरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरूआत कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, सीईओ नीरज अग्रवाल, सीएफओ विवेक अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह, डीन एकेडमिक प्रो. आशीष शर्मा, सीओई प्रो. अतुल बंसल, आईटी डायरेक्टर प्रो. अशोक भंसाली ने दीप प्रज्जवलित कर किया। तत्पश्चात सरस्वती वंदना आयोजित हुई।
कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जीवन, शिक्षा और सकारात्मक सोच के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत विनम्रता के साथ करते हुए कहा कि “शायद मेरी बातों से आपको बोरियत लगे, लेकिन जीवन जीएलए में कभी भी बोरिंग नहीं होने वाला है। क्योंकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रटना नहीं है, बल्कि सोचने, प्रश्न पूछने और आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग) की क्षमता का विकास करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा हमारे मन को जटिल और बोझिल बना दे, तो वह शुभ नहीं है। शिक्षा हमें युवा बनाए, आनंद और ज्ञान से भर दे।

उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मस्तिष्क के विकास की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि न्यूरोजेनेसिस, सिनैप्टोजेनेसिस और मायलिनेशन जैसे कारक हमारे मस्तिष्क को नई चुनौतियों से निपटने की क्षमता देते हैं। कठिन सवाल पूछना और समाधान तलाशना ही मस्तिष्क को सक्रिय बनाता है। कुलपति ने छात्रों को आह्वान किया कि वे बिना हिचक और संकोच सवाल पूछें, संदेह करें और अपनी सोच विकसित करें। दूसरों से ली हुई सोच से अधिक मूल्यवान अपनी मौलिक सोच होती है। शंका की पीड़ा ही विचारों के जन्म की जननी है।

चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर एवं मोटीवेशनल स्पीकर नीरज अग्रवाल ने विद्यार्थियों से जीवन, करियर और सफलता से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए। अपने अनोखे अंदाज में उन्होंने स्लाइड्स, प्रेरक शेरो-शायरी और कहानियों के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल मार्गदर्शन दिया बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, अनुशासन और दूरदर्शिता की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता का पहला मंत्र है खुद से प्रेम करना, क्योंकि जब तक हम स्वयं से प्यार नहीं करेंगे तब तक अनुशासन, एकाग्रता और लक्ष्य निर्धारण जीवन में संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास ही वह नींव है जिस पर भविष्य की इमारत खड़ी होती है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कई प्रेरक शेर सुनाए और कहा “हार हो जाती है जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है” जिस पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने गुब्बारे वाले बच्चे की कहानी सुनाकर समझाया कि जैसे गुब्बारे रंग या आकार से नहीं बल्कि उनके भीतर की हवा से उड़ते हैं, उसी तरह इंसान की ऊंचाइयां उसकी जाति या पृष्ठभूमि से नहीं बल्कि उसके भीतर के जुनून और आत्मविश्वास से तय होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हर इंसान में आगे बढ़ने की अपार क्षमता है, बस जरूरत है खुद पर विश्वास रखने की।

सीएफओ विवेक अग्रवाल ने विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी जीवन में ये जो आने वाले साल हैं ये सिर्फ एक डिग्री पाने के लिए नहीं, बल्कि अपने आपको निखारने के साल हैं। यहां जो आप सीखेंगे, वही आपकी सोच बनाएगा, आपका आत्मविश्वास बढ़ाएगा और आपको इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में टिके रहने लायक बनाएगा। आपने इस संस्थान को चुना और मैं विश्वास से कह सकता हूँ, यह आपका सबसे सटीक फैसला है। क्योंकि जीएलए विश्वविद्यालय सिर्फ ज्ञान नहीं देता, यहां शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थी को संस्कार, दृष्टिकोण और बेहतर अवसर मिलते हैं।
कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि नवप्रवेषित विद्यार्थी अब परम्परागत पाठ्यक्रम के बाद तकनीकी एवं व्यवसायिक पाठयक्रम से जुड़े हैं, जहां से विद्यार्थी जीवन को नई दिशा देखने को मिलेगी। कुलसचिव ने विद्यार्थियों को ऑरिएंटेशन के माध्यम से विश्वविद्यालय के 27 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि कुलाधिपति नारायणदास दास अग्रवाल ने अपने वर्ष 1998 में जीएलए इन्स्टीट्यूट की स्थापना की। कुलाधिपति का एक सपना था कि देश में उच्चकोटि का विश्वविद्यालय बने और सभी छात्र-छात्राओं को अपना सपना एवं लक्ष्य पूरा करने में कोई कठिनाई न हो और उनका सपना साकार हुआ जो अब एक विशाल विष्वविद्यालय बन चुका है।
कुलसचिव ने अंत में कहा कि छात्र जीवन में सफल होने के लिए कुछ बातें बहुत जरूरी हैं। यदि विद्यार्थी अमल करेगें, तो सफलता आपके कदम चूमेगी। सबसे पहले गोल सेट करना- इसी से विद्यार्थी जीवन की आगे की कहानी लिखी जायेगी। रूचियों के अनुसार अपना लक्ष्य एवं उद्देश्य स्वयं तय करें, बहुत ही सोच विचार के लक्ष्य निर्धारण के लिए फैसला लेना चाहिए। क्योंकि हर छात्र में कोई न कोई प्रतिभा होती है अर्थात् अपनी प्रतिभा को पहचान कर लक्ष्य को तय करें।
जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में स्नातक स्तर पर- बी.टेक, बी.फॉर्मा, बीएससी, बायोटेक, बीए, बीकॉम, बीए और बीकॉम एलएलबी ऑनर्स, डिप्लोमा इन फॉर्मेसी, स्नातकोत्तर स्तर पर एमटेक, एमबीए, एम.फॉर्मा (फार्मोकोलॉजी एण्ड फार्मास्यूटिक्स) सहित आदि कोर्सों के नव-प्रवेशित छात्र-छात्राओं ने ऑरिएंटेशन में शिरकत की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रो. आशीष शर्मा, आईटी निदेशक प्रो. अशोक भंसाली, मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो. अतुल बंसल, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. हिमांशु शर्मा, प्रबंधन संकाय निदेशक प्रो. अनुराग सिंह, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनय देवलिया ने भी विश्वविद्यालय के शिक्षण सत्र के बारे में छात्रों को जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डा. विवेक मेहरोत्रा ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दीपक गौड़ सहित विभिन्न पदाधिकारियों का सहयोग सराहनीय रहा।

