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पीएम मोदी 7 साल बाद चीन पहुंचे:SCO समिट में शामिल होंगे; जिनपिंग-पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे

बीजिंग : प्रधानमंत्री मोदी दो दिन की जापान यात्रा के बाद शनिवार को SCO समिट में शामिल होने के लिए चीन पहुंच गए हैं। वे सात साल बाद चीन पहुंचे हैं।

SCO समिट से इतर पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन के दिसंबर में भारत दौरे के प्रोग्राम पर भी चर्चा होगी।

पीएम मोदी की यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब पूरी दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों से जूझ रही है। ट्रम्प ने भारत पर 50% तो चीन पर 30% टैरिफ लगाया है।

चीन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक SCO समिट की बैठक होने वाली है। इसमें 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे।

पीएम मोदी चीन पहुंचने के बाद प्लेन से उतरते हुए।

पीएम मोदी चीन पहुंचने के बाद प्लेन से उतरते हुए।

एयरपोर्ट पर चीन की एक बच्ची पीएम मोदी को गुलदस्ता देकर उनका स्वागत करते हुए।

एयरपोर्ट पर चीन की एक बच्ची पीएम मोदी को गुलदस्ता देकर उनका स्वागत करते हुए।

पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर भारतीय और चीनी अधिकारियों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया।

पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर भारतीय और चीनी अधिकारियों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया।

भारतीय पीएम के स्वागत में एयरपोर्ट पर कलाकारों ने पारंपरिक चीनी डांस किया।

भारतीय पीएम के स्वागत में एयरपोर्ट पर कलाकारों ने पारंपरिक चीनी डांस किया।

पीएम मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट बिछाया गया।

पीएम मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट बिछाया गया।

भारतीय प्रवासियों ने वंदे मातरम के नारे लगाए

प्रधानमंत्री के तियानजिन के एक होटल में पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। भारतीय प्रवासियों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए।

वहीं चीनी कलाकारों ने पीएम मोदी के सामने भारतीय शास्त्रीय संगीत और डांस का प्रदर्शन किया। ये कलाकार कई सालों से भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य सीख रहे हैं।

मोदी का चीन दौरा खास क्यों है

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक PM मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और द्विपक्षीय बातचीत को बढ़ावा देने का एक बड़ा मौका साबित हो सकती है।जिनपिंग इस समिट के जरिए दुनिया को यह दिखाने की कोशिश करेंगे वे अमेरिका के लीडरशिप वाले ग्लोबल ऑर्डर का एक विकल्प दे सकते हैं।

इसके साथ ही इस समिट से यह मैसेज भी जाएगा कि चीन, रूस, ईरान और अब भारत को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशें नाकाम रही हैं।जून 2025 में किंगदाओ में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया था, क्योंकि उसमें 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र नहीं था।

अब SCO नेताओं के शिखर सम्मेलन में इसका जिक्र किया जा सकता है। साथ ही आतंकवाद के मुद्दे पर भारत सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगा। गौरतलब हो कि पाकिस्तान भी SCO का सदस्य है।

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