पाली : 15 साल की राखी के पैरों में जंजीर है। यह जंजीर किसी और ने नहीं, बल्कि इसके माता-पिता ने डाला है। उन्हें आशंका है कि जंजीर खोल देने पर वह (राखी) किसी न किसी को नुकसान पहुंचा देगी। यह पाली जिले के रोहट इलाके की राखी (बदला हुआ नाम) है।
इसकी इस हालत का जिम्मेदार ‘अपने’ ही हैं। चाचा के परिवार से हुए जमीनी विवाद में किसी इस मासूम के सिर पर लाठी दे मारी। इसके बाद इसकी तबीयत बिगड़ी और आज हालात यह बन गए हैं।
हमेशा गुमसुम रहती है। बिना बताए कहीं भी चली जाती है। घर में माता-पिता परेशान होते रहते हैं। कभी खुद के तो कभी पड़ोसियों के कपड़े फाड़ देती है। इसी से बचने के लिए परिवार वाले जंजीर में बांधकर रखते हैं।
अब एक ही पलंग के आस-पास उसकी जिंदगी गुजर रही थी। खाना-पीना सबकुछ वही हो रहा था। सोशल मीडिया पर इसके फोटो-वीडियो सामने आए तो CMHO डॉ. विकास मारवाल ने टीम भेजी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले कर आए। डॉक्टर बताते हैं- ये ‘साइकोसिस डिसऑर्डर’ है। अब बच्ची का इलाज किया जाएगा।

जैसे ही पाली CMHO को सोशल मीडिया पर मासूम का वीडियो मिला, उन्होंने तुरंत टीम को रवाना कर बच्ची को पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में भर्ती कराया।
शनिवार 20 सितंबर
पाली CMHO विकास मारवाल के पास सोशल मीडिया के जरिए एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में जंजीरों में जकड़ी मासूम को देखा तो उन्होंने डिप्टी CMHO डॉ. वेदांत गर्ग को मौके पर भेजा। जहां गर्ग ने उसके परिजनों से सारी कहानी सुनी।
इसके बाद एम्बुलेंस बुलाई गई और पीड़िता को इलाज के लिए शनिवार शाम को पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया। जहां मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दलजीत सिंह राणावत ने लड़की के सेहत की जांच करने के बाद इलाज शुरू किया है।

अस्पताल में डॉक्टर बच्ची का इलाज कर रहे हैं।
चाचा के परिवार ने किया हमला, सिर पर लाठी मारी थी
पीड़िता के पिता बताते हैं- वे पहले पाली के ही दूसरे गांव रहते थे। जहां खेतों में कोयले बनाने और खेत की रखवाली का काम करते थे। 8 महीने पहले अपने मूल गांव में परिवार सहित आकर रहने लगे। यहां खेत और मकान में उनका भी हिस्सा है।
चाचा का परिवार वह हिस्सा हमें नहीं देना चाहता था। 3 महीने पहले चाचा के परिवार ने हमारे पूरे परिवार पर हमला कर दिया। इस हमले में 15 साल की मासूम बेटी के सिर पर भी लाठी का वार किया।
इस घटना वे वह बहुत घबरा गई और उसके बाद से उसकी तबीयत खराब रहने लगी। कभी चुपचाप बैठी रहती तो कभी बिना बताए घर से निकल जाती।
कभी खुद के कभी महिलाओं के कपड़े फाड़ देती
पीड़िता के पिता बताते हैं- ऐसे में जोधपुर ले गए जहां इलाज करवाया। लेकिन पिछले एक महीने से इसकी तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी। बिना बताए घर से निकल जाती। कभी खुद के पूरे कपड़े फाड़ देते थी तो कभी गांव की महिलाओं पर हमला कर उनके कपड़े फाड़ देती। मिट्टी और सीमेंट तक खा लेती थी। इसका खुद पर कंट्रोल नहीं था। इसलिए मजबूरी में इसे जंजीर से बांधकर रखते थे ताकि यह खुद किसी हादसे का शिकार न हो और न किसी दूसरे पर हमला करे।
साइकोसिस डिसऑर्डर से पीड़ित
मामले में पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर दलजीत सिंह राणावत ने बताया कि पीड़िता साइकोसिस डिसऑर्डर से पीड़ित है। मारपीट में सिर में चोट लगने और सदमा बैठने से इसे नींद आना कम हो गई।
जिससे साइकोसिस डिसऑर्डर बीमार की चपेट में आ गई। इस बीमारी में मरीज, सही और गलत के बीच फर्क नहीं कर पाता है। उसे अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती और दिखाई देती हैं, जो वास्तविक नहीं होती हैं।
मरीज को समझ नहीं पाता है परिवार
राणावत ने बताया कि इसके साथ-साथ, साइकोसिस डिसऑर्डर का मरीज डिफ्यूजन या हैलूसिनेशन जैसी चीजों में फंसा हुआ होता है। ये दोनों ही ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीज अलग-अगल तरह की चीजों का अनुभव करता है, जो उसके मन का वहम हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में मरीज इसी कंफ्यूजन में रहता है कि उसके घर-परिवार वाले उसे समझने की कोशिश नहीं करते हैं। अजीब-अजीब हरकतें करता है। इसका इलाज संभव है। इसलिए इसे उपचार के लिए भर्ती किया है।

