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Thu. Feb 12th, 2026

NHAI ने पूरा किया छत्तीसगढ़ के पहले राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग का निर्माण, जानें कब शुरू होगा यातायात

  • NHAI के एक अधिकारी ने बताया कि 464 किलोमीटर लंबा 6 लेन का नेशनल हाईवे-130CD रायपुर और विशाखापत्तनम के बीच यात्रा समय को काफी हद तक कम करेगा

रायपुर : भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत छत्तीसगढ़ में 2.79 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया है। इस सुरंग के निर्माण में 12 महीने का समय लगा। अधिकारियों ने रविवार को ये जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, ये राज्य की पहली राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग है, जो कांकेर और कोंडागांव जिलों की सीमा पर पहाड़ियों के नीचे से गुजरती है। ये क्षेत्र ओडिशा से सटा हुआ है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि सुरंग बायीं दिशा की है, जबकि दायीं दिशा की सुरंग की खुदाई का काम इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है।

NHAI के एक अधिकारी ने बताया कि बायीं सुरंग मार्च-अप्रैल 2026 तक यातायात के लिए तैयार हो जाएगी, जबकि दायीं सुरंग जुलाई-अगस्त तक पूरी होकर यातायात के लिए खोल दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 464 किलोमीटर लंबा 6 लेन का नेशनल हाईवे-130CD रायपुर और विशाखापत्तनम के बीच यात्रा समय को काफी हद तक कम करेगा और छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के बीच व्यापार, उद्योग और संपर्क को बढ़ावा देगा। 

एनएचएआई ने बताई ऐतिहासिक उपलब्धि 

एनएचएआई ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर किए गए पोस्ट में बताया, ‘‘एनएचएआई ने सिर्फ 12 महीनों में छत्तीसगढ़ की पहली राष्ट्रीय राजमार्ग सुरंग (लेफ्ट हैंड साइड) का निर्माण पूरा कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारे (एनएच-130सीडी) की 2.79 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।’’ 

छत्तीसगढ़ में पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण के नए मौके प्रदान करेगा सुरंग

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने एक बयान में कहा कि ये सुरंग छत्तीसगढ़ को समृद्ध और सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सड़क और परिवहन बुनियादी ढांचे का विकास राज्य की प्रगति की रीढ़ है और ये सुरंग छत्तीसगढ़ में पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण के नए अवसर भी प्रदान करेगी। साई ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और एनएचएआई टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

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