नई दिल्ली : टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों पर मजाक का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बनर्जी गडकरी से पूछ रहे हैं कि एक मिला क्या।
इसके बाद दोनों सांसद ठहाका लगाते हैं। पास खड़े लोग भी मुस्कुराने लगते हैं। यह वाकया संसद परिसर का है, जब दोनों नेता मिलते हैं।
इस दौरान कल्याण बनर्जी ने मजाकिया अंदाज में गडकरी से कहा कि पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बार-बार एक करोड़ घुसपैठियों का जिक्र किया था। एक मिला क्या?
दरअसल, देश के 12 राज्यों में चुनाव आयोग SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) चला रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसके जरिए लोगों को जबरन घुसपैठिया बताकर देश से निकाल रही है।

कल्याण बनर्जी कहते हैं- एक मिला क्या?
- कल्याण बनर्जी: दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए कहा कि निकाल कर बाहर फेंकेंगे। फिर केंद्रीय मंत्री को एक अंगुली दिखाते हुए कहा कि एक मिला क्या ?
- गडकरी: आपको मिलवाएंगे कभी
- कल्याण बनर्जी: नहीं, नहीं आपको मिला क्या?
इसके बाद कल्याण गडकरी का हाथ पकड़कर पास लाते हैं और कान में कुछ कहते हैं। फिर दोनों जोर से हंसने लगते हैं। गडकरी फिर मुस्कुराते हुए आगे निकल जाते हैं।
कुछ कदम आगे बढ़ने पर गडकरी, कल्याण बनर्जी को अपनी कार दिखाकर कहते हैं हाइड्रोजन से चलती है।
इस पर कल्याण बनर्जी फिर मजाकिया लहजे में गडकरी से कहते हैं- आप इतना गाड़ियों का क्या करेंगे? एक-दो हमारे पास भी भेज दीजिए न। जो आप नौकर-वोकर को दे देते हैं। एक-दो हम लोगों को दे दीजिए।

कल्याण गडकरी के कान में कुछ कहते हैं।

कल्याण और गडकरी के बीच करीब 5 मिनट बातचीत हुई।
अब जानिए SIR को लेकर विपक्ष के सरकार पर क्या आरोप हैं…
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल खड़ा करता आ रहा है। दावा है कि सरकार एक ओर घुसपैठियों की बड़ी संख्या होने का दावा करती है। दूसरी ओर SIR के जरिए उनकी पहचान और निष्कासन को लेकर कोई स्पष्ट, पारदर्शी डेटा सामने नहीं रखती।
आरोप है कि घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर SIR का इस्तेमाल वैध भारतीय मतदाताओं के नाम काटने के लिए किया जा रहा है, न कि अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए। जिन इलाकों में अल्पसंख्यक या बॉर्डर पर रहने वाली आबादी ज्यादा है, वहां सबसे ज्यादा नाम हटाए गए। उन्हें घुसपैठ से जोड़कर दिखाया गया है।
घुसपैठिया शब्द का राजनीतिक इस्तेमाल कर आम लोगों में डर पैदा किया जा रहा है। हमारी मांग है कि SIR के जरिए अब तक कितने वास्तविक घुसपैठियों की पहचान हुई और कितने नाम वैध कारणों से हटाए गए। सरकार इसकी जानकारी दे।

