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Sat. Feb 14th, 2026

मथुरा यमुना एक्सप्रेस-वे हादसे के लिए अफसर जिम्मेदार, 19 जिंदा जले थे:66 पेजों की पहली जांच रिपोर्ट

मथुरा : मथुरा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे की 66 पेजों की पहली जांच गोपनीय रिपोर्ट सौंप दी गई। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के अफसरों को हादसे का जिम्मेदार ठहराया गया है। दावा किया गया है कि जहां 19 लोग जिंदा जल गए, वह जगह ब्लैक स्पॉट थी।

सड़क नीची और घुमावदार है। इसलिए संकेतक कोहरे में दिखाई नहीं देते। सड़क पर पेंटिंग दूर-दूर तक नहीं की गई। रोड पर लाइट नहीं लगाई गई थी। घने कोहरे में रिफ्लेक्टर भी दिखाई नहीं पड़ते हैं। घटनास्थल पर CCTV भी नहीं थे, जिसके कारण हादसा कैसे हुआ, इसके बारे में ठीक से जानकारी नहीं मिल सकी।

16 दिसंबर को यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के चलते 18 गाड़ियां आपस में टकरा गई थीं। 6 बसों और 3 कारों में आग लग गई थी। हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। 90 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद DM ने 6 सदस्यीय टीम बनाई थी। इसे ADM प्रशासन अमरेश कुमार लीड कर रहे थे। टीम ने 48 घंटे के अंदर जांच कर शुक्रवार शाम को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

जली हुई बस के अंदर से 5 लीटर वाला छोटा गैस सिलेंडर मिला है।

जली हुई बस के अंदर से 5 लीटर वाला छोटा गैस सिलेंडर मिला है।

IIRT टीम की 3 घंटे जांच, जली बस में मिला सिलेंडर

इसके अलावा हादसे की जांच के लिए हरियाणा की IIRT टीम भी जांच कर रही है। इसमें 11 सदस्य शामिल थे। शुक्रवार को IIRT की HOD डॉ. श्रुति टीम के साथ घटनास्थल पहुंचीं और वहां 3 घंटे तक बारीकी से जांच की। स्पॉट से सैंपल लिए।

टीम ने वहां से गुजर रही दो डबल डेकर बसों को रुकवाया। इसके बाद बसों के अंदर जाकर जांच की। बसों के अंदर इमरजेंसी गेट, टायर फिटनेस, फर्स्ट एड बॉक्स को देखा। यह भी जानने की कोशिश की कि आपातकालीन स्थिति में डबल डेकर बस से निकलने में यात्रियों को क्या दिक्कतें आती हैं।

एक्सप्रेस-वे पर निरीक्षण करने के बाद जांच अधिकारी फोरेंसिक टीम के साथ राया कट पर पहुंचे। यहां टीम ने यार्ड में रखी जली हुई गाड़ियों को देखा। एक बस के अंदर से 5 किलो का गैस सिलेंडर, जला मोबाइल और यात्रियों का कुछ सामान मिला, जिसे जांच के लिए लैब भेज दिया गया।

जांच टीम ने पाया कि जहां हादसा हुआ, वहां ब्लैक स्पाट था। लाइट और रिफ्लेक्टर नहीं लगे थे।

जांच टीम ने पाया कि जहां हादसा हुआ, वहां ब्लैक स्पाट था। लाइट और रिफ्लेक्टर नहीं लगे थे।

हादसे वाली जगह सड़क नीची और घुमावदार है। इसलिए संकेतक कोहरे में दिखाई नहीं देते।

हादसे वाली जगह सड़क नीची और घुमावदार है। इसलिए संकेतक कोहरे में दिखाई नहीं देते।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के चलते हादसा, 19 जिंदा जले

मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के चलते कोहरे के चलते 18 गाड़ियां आपस में टकरा गई थीं। 6 बसों और 3 कारों में आग लग गई थी। भाजपा नेता समेत 19 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। 90 से ज्यादा घायल हो गए थे। हादसा थाना बलदेव क्षेत्र में माइलस्टोन 127 पर हुआ था।

हादसा जिस वक्त हुआ, एक्सप्रेस-वे पर घना कोहरा था। अचानक स्लीपर बस के सामने धुंध आ गई। इसके चलते ड्राइवर ने ब्रेक मारकर स्पीड धीमी की। इसके बाद पीछे चल रहे वाहन टकराते चले गए। टक्कर से एसी बस में आग लग गई। लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला।

कैसे चला था रेस्क्यू ऑपरेशन

  • करीब 4 बजे राहगीर ने पुलिस को सूचना दी। 10 मिनट के अंदर बलदेव थाने की पुलिस पहुंची। तब तक ग्रामीण पहुंच गए थे। 4.30 बजे फायर ब्रिगेड टीम आई। भीषण आग को देखते हुए मथुरा, रिफाइनरी और हाथरस से फायर ब्रिगेड की 11 गाड़ियां बुलाई गईं।
  • एक-एक करके 14 एम्बुलेंस भी पहुंचीं। दमकल ने एक घंटे में आग पर काबू पाया। इसके बाद बसों के अंदर रेस्क्यू शुरू हुआ। फायर ब्रिगेड, एक्सप्रेस-वे कर्मचारी, मथुरा के 9 थानों की पुलिस, मेडिकल स्टाफ के करीब 50 लोग लगाए गए।
  • घायलों को वृंदावन के जिला संयुक्त अस्पताल, मथुरा जिला अस्पताल और आगरा के SRN मेडिकल कॉलेज भेजा गया। टीम बसों के अंदर गई तो जली हुई डेडबॉडी पड़ी थीं। इन्हें 17 बैग में भरकर मथुरा के पोस्टमॉर्टम हाउस भेजा। 4.30 से शुरू हुआ रेस्क्यू 10.30 बजे खत्म हुआ।
  • पुलिस के मुताबिक, डेडबॉडी क्षत-विक्षत हो चुकी थीं। ऐसे में शवों की शिनाख्त के लिए DNA टेस्ट कराया जाएगा। हालांकि, शवों को पहचान के लिए 72 घंटे मोर्चरी में रखा जाएगा। 2 टीम पोस्टमॉर्टम करेंगी।

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