दैनिक उजाला, मथुरा : जिले में एक लाख स्मार्ट मीटर लगाए जाने की उपलब्धि पर विद्युत विभाग ने जश्न मनाते हुए केक काटा, लेकिन यह कार्यक्रम ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए राहत नहीं, बल्कि नाराजगी का कारण बन गया है। जिस जिले में देहात क्षेत्र आज भी जानलेवा बिजली व्यवस्था से जूझ रहा हो, वहां ऐसे जश्न सवालों के घेरे में हैं।
ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह नंगे तार लटक रहे हैं, खुले पड़े पावर बॉक्स, टेढ़े और जर्जर खंभे हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। इसके बावजूद विभाग स्मार्ट मीटर की संख्या गिनाकर अपनी पीठ थपथपाने में जुटा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि RDSS के तहत करोड़ों रुपये की योजनाएं लागू होने के बावजूद हालात क्यों नहीं सुधरे? ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता ने आज तक RDSS योजना के अंतर्गत किसी भी गांव में जाकर न तो गंभीर निरीक्षण किया और न ही मौके पर कार्यों की वास्तविक स्थिति देखी।
अगर निरीक्षण किया गया है, तो फिर कौन-कौन से गांवों में क्या-क्या कार्य हुए? किन जर्जर लाइनों को बदला गया? कितने खंभे बदले गए और कितने पावर बॉक्स सुरक्षित किए गए? इन सवालों का जवाब आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। निरीक्षण के नाम पर केवल फाइलों में रिपोर्ट और कागजों में कार्य दिखाने का आरोप भी लग रहा है।
बलदेव निवासी उमेश पांडेय ने कहा, RDSS योजना का नाम तो बहुत बड़ा है, लेकिन गांवों में उसका कोई असर नहीं दिखता। चीफ इंजीनियर और SE अगर कभी गांवों में आते, तो शायद यह बदहाली न होती।
छाता के गांव खायरा निवासी परमानंद शर्मा ने सवाल उठाया कि अगर अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं, तो फिर नंगे तार और झूलते खंभे क्यों बचे हुए हैं? यह साफ तौर पर लापरवाही और उदासीनता को दिखाता है।
गोवर्धन निवासी शिवशंकर शर्मा ने कहा, “RDSS के नाम पर सिर्फ बोर्ड और बैनर लगे हैं, जमीनी काम नहीं। खुले पावर बॉक्स बच्चों की जान के दुश्मन बने हुए हैं।
फरह निवासी लवकुश ने कहा, अधिकारियों की गैरमौजूदगी में ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। जब तक बड़े अधिकारी मौके पर आकर जवाबदेही तय नहीं करेंगे, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे।
ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाना तभी सार्थक होगा, जब पहले RDSS योजना के तहत गांवों में मजबूत लाइनें, सुरक्षित खंभे और दुरुस्त पावर सिस्टम तैयार किया जाए। जनता अब जश्न नहीं, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई चाहती है।

