Breaking
Thu. Feb 12th, 2026

लक्खी मेला बनाम बलदेव छठ: नगर पंचायत बलदेव के विवादित फैसले से गरमाई राजनीति

  • अगहन पूर्णिमा लक्खी मेला मुद्दे पर नगर पंचायत बलदेव कटघरे में, विधायक की मांग दरकिनार कर भड़का जनआक्रोश

संवाददाता- सौरभ पांडेय

दैनिक उजाला, बलदेव : ऐतिहासिक और जनआस्था से जुड़े अगहन पूर्णिमा लक्खी मेला को राजकीय मेला घोषित किए जाने की मांग पर सियासत तेज हो गई है। क्षेत्रीय विधायक पूरन प्रकाश द्वारा मुख्यमंत्री से इस मेले को राजकीय दर्जा दिए जाने की मांग किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने नगर पंचायत बलदेव से आख्या मांगी थी, लेकिन नगर पंचायत बोर्ड बैठक ने इस मांग पर पानी फेरते हुए विवादास्पद निर्णय ले लिया।

नगर पंचायत की बोर्ड बैठक में विधायक की मांग को दरकिनार करते हुए बलदेव छठ को राजकीय घोषित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इस निर्णय के बाद क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, विशेषकर पांडेय समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यह फैसला न केवल जनभावनाओं के विपरीत है, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा और आस्था की खुली अनदेखी भी है।

पांडेय समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि बलदेव छठ मंदिर श्री दाऊजी महाराज का पर्व एक दिवसीय धार्मिक आयोजन है, जबकि अगहन पूर्णिमा लक्खी मेला सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा एक विशाल सांस्कृतिक और धार्मिक मेला है, जिसमें हर वर्ष दूर-दराज से श्रद्धालु, व्यापारी और पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा एक दिवसीय पर्व को प्राथमिकता देना और लक्खी मेले की अनदेखी करना समझ से परे है।

कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष पीतांबर पांडेय, प्रवीन पांडेय, किशोरी पांडेय, ब्रजबिहारी पांडेय, सुरेश चंद्र पांडेय, रविकांत पांडेय, खूबी राम पांडेय, गौरव पांडेय, सौरभ पांडेय, भगवत पांडेय और बलदेव पांडेय सहित समाज के अन्य लोगों ने एक स्वर में कहा कि नगर पंचायत का यह निर्णय जनआस्था पर चोट है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पंचायत ने न तो ऐतिहासिक तथ्यों को महत्व दिया और न ही क्षेत्रीय जनभावनाओं का सम्मान किया।

समाज के लोगों का कहना है कि विधायक द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही इस जायज मांग को नजरअंदाज कर नगर पंचायत ने जनता की आवाज को दबाने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगहन पूर्णिमा लक्खी मेला को राजकीय घोषित करने की मांग पर शीघ्र पुनर्विचार नहीं किया गया, तो पांडेय समाज सहित क्षेत्रीय जनता आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पंचायत प्रशासन की होगी।

फिलहाल नगर पंचायत के इस फैसले ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है, वहीं बलदेव क्षेत्र में यह मुद्दा तेजी से जन आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *