बरेली : अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री दूसरे दिन भी हाउस अरेस्ट हैं।
उन्होंने कहा- मुझे घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही। लेकिन, राज्यभर के कई संगठन संपर्क में हैं। आने वाले समय में हम बड़े फैसले लेंगे। यूजीसी का नया नियम छात्रों को जातियों में बांट देगा। शिक्षण संस्थानों में कलह बढ़ेगी। देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने का खतरा है। हालात ऐसे न बन जाएं कि स्थिति संभालने के लिए देश के भीतर ही सेना उतरनी पड़े।
वहीं, “पंडित पागल हो गया है” इस टिप्पणी पर उन्होंने कहा- यह सभी जानते हैं। मैं किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लेना चाहता। जनता खुद सब समझती है।
इस्तीफा के अगले ही दिन नजरबंद
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा यह स्थिति सीधे तौर पर संवैधानिक संकट की ओर इशारा करती है। संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मुझे प्राप्त मौलिक अधिकारों (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन की स्वतंत्रता) का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। जब किसी नागरिक के मौलिक अधिकार बाधित किए जाते हैं, तो यह माना जाना चाहिए कि संवैधानिक व्यवस्था विफल हो चुकी है।
मुझे घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है, लेकिन राज्यभर के कई संगठन लगातार हमारे संपर्क में हैं। आने वाले समय में हम बड़े और निर्णायक विकल्पों पर विचार करेंगे।
क्या इस्तीफा देने से पहले आपने परिवार से कोई सलाह ली थी?
यह अब केवल एक परिवार तक सीमित मामला नहीं रह गया है। मैं सैकड़ों-हजारों परिवारों के संपर्क में हूं। इस समय पूरा देश चिंतित है और हर वर्ग के लोग परेशान हैं।
आखिर यूजीसी (UGC) के इस नए रेगुलेशन का इतना विरोध क्यों
यह रेगुलेशन पूरे समाज के लिए घातक है। इसमें सामान्य वर्ग को पहले से ही स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। कोई भी व्यक्ति झूठी शिकायत कर सामान्य वर्ग के युवाओं और उनके परिवारों को फंसा सकता है। यह व्यवस्था समाज में जहर घोलने जैसी है।
शिक्षण संस्थानों में हम जाति देखकर मित्रता नहीं करते। चाहे कोई हिंदू हो, मुस्लिम, सिख या ईसाई सभी साथ पढ़ते हैं। लेकिन यह नियम विद्यार्थियों को अलग-अलग समूहों में बांट देगा। इससे संस्थानों के अंदर आंतरिक कलह बढ़ेगी और देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने का खतरा पैदा हो सकता है।
मुझे आशंका है कि जो सेना देश की सीमाओं पर लड़ती है, उसे हालात बिगड़ने पर देश के अंदर व्यवस्था संभालने के लिए उतरना न पड़े।
“पंडित पागल हो गया है” यह टिप्पणी किसने की?
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा यह आप सभी जानते हैं। मैं किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लेना चाहता। जनता खुद सब समझती है। इस पर मेरी ओर से कोई टिप्पणी नहीं है।

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा देने के बाद अपने नाम के आगे रिजाइन लिखा था।
अब जानिए अलंकार अग्निहोत्री के बारे में
अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। मां बैंक में थीं। 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला।
इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे। 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई सेटल हो गए। बहन की शादी हो गई, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर UPPCS की तैयारी की और 2019 में एग्जाम क्वालिफाई किया।

