नई दिल्ली : कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर दो पोस्ट की हैं। उन्होंने लिखा- यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है। पीएम किसलिए जेफ्री एपस्टीन की सलाह ले रहे थे?
पहली पोस्ट में खेड़ा ने लिखा है कि जेफ्री एपस्टीन को अमेरिका में मानव तस्करी, नाबालिगों के यौन शोषण और बलात्कार का दोषी ठहराया है, वो लिखता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसकी सलाह मानी। अमेरिका के राष्ट्रपति को फायदा पहुंचाने के लिए इजराइल में नाच-गाना किया। कुछ हफ्ते पहले उनकी मुलाकात हुई थी और यह काम कर गया।
खेड़ा ने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की लिंक शेयर करते हुए लिखा है कि भारत के पीएम का ऐसे बदनाम व्यक्ति के इतने करीब होना, उनके फैसलों, पारदर्शिता और कूटनीतिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब यह साफ है कि पीएम का एपस्टीन के साथ सीधा संबंध रहा है, जिसकी अब तक कोई साफ वजह सामने नहीं आई है।
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके एपस्टीन फाइल्स में लगाए गए आरोपों का खंडन किया। सरकार ने कहा- एपस्टीन घोषित अपराधी है। उसकी बातें गंभीरता से नहीं लेनी चाहिए।
खेड़ा ने कहा- पीएम इनके जवाब दें
एपस्टीन की बदनाम ‘एलीट लोगों की लिस्ट’ सामने आने के बाद से दुनियाभर में लगातार विवाद चल रहा है। एपस्टीन और पीएम मोदी के बीच यह संबंध देश की इज्जत और अंतरराष्ट्रीय छवि से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए प्रधानमंत्री को खुद सामने आकर तत्काल हमारे 3 सवालों का जवाब देना चाहिए।
- वे जेफ्री एपस्टीन की सलाह किसलिए ले रहे थे?
- इजराइल में अमेरिकी राष्ट्रपति के किस लाभ लिए वे नाच-गा रहे थे?
- मैसेज में लिखा है – ‘IT WORKED!’ तो, क्या कामयाबी हासिल हुई?
खेड़ा की दूसरी पोस्ट
खेड़ा ने चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इस पर 24 मई 2019 की तारीख है। इसमें लिखा- 24 मई 2019 को नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ ली। इससे कुछ दिन पहले जेफ्री एपस्टीन ने स्टीव बैनन (ट्रम्प के करीबी) को बताया कि…
- उसकी (एपस्टीन) मोदी के साथ एक ‘दिलचस्प’ बैठक हुई थी।
- मोदी ने उसे बताया कि वाश (वाशिंगटन) में कोई उससे बात नहीं करता।
- मोदी ने उसे बताया कि मुख्य दुश्मन चीन है और क्षेत्र में उसका प्रॉक्सी पाकिस्तान।
- मोदी स्टीव बैनन के विजन से पूरी तरह सहमत हैं।
- स्टीव बैनन को मोदी से मिलना चाहिए और एप्स्टीन इसे सेट कर सकता है।

खेड़ा ने पोस्ट में चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इस पर 24 मई 2019 की तारीख है।
सरकार बोली- मेल में एक अपराधी की मनगढ़ंत बातें
एपस्टीन फाइल्स पर विदेश मंत्रालय का बयान भी आया है। इसमें लिखा- हमने एपस्टीन फाइल्स से जुड़े एक ई-मेल को लेकर आई खबरें देखीं, जिनमें पीएम के इजराइल दौरे का जिक्र है। जुलाई 2017 में पीएम का इजराइल जाना आधिकारिक और सच बात है। ई-मेल में इसके अलावा कही गईं बाकी बातें एक दोषी की मनगढ़ंत और बेकार बातें हैं, जिन्हें पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।

खेड़ा ने लिखा- इस चर्चा से कुछ सवाल उठते हैं….
क्या बैनन और मोदी के बीच यह प्रस्तावित बैठक हुई? इसमें क्या चर्चा हुई?
2019 चुनावों के ठीक आसपास मोदी एक बदनाम अमेरिकी जेफरी एप्स्टीन से क्यों मिल रहे थे?
जब ‘वाश’ में कोई उनसे बात करने की परवाह न करता हो, तो मोदी द अमेरिका के साथ अपनी दोस्ती के बारे में देश से क्यों झूठ बोल रहे थे?
गलवान संकट के एक साल बाद ही उन्होंने अपने ‘मुख्य दुश्मन’ चीन को क्लीन चिट क्यों दे दी?
अमेरिकी मीडिया कार्यकारी, राजनीतिक रणनीतिकार, पंडित- स्टीव बैनन के किस ‘विजन’ से मोदी सहमत हैं?

