- एक ऐसा मामला अभी झारखंड के गढ़वा से सामने आया है जिसके बारे में जानने के बाद आपको उस पर आसानी से यकीन नहीं होगा क्योंकि आपने अब तक ऐसा कहीं सुना नहीं होगा
आधी फरवरी बीत गई है और साथ ही साथ छात्रों की परिक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। कई सारे राज्यों में 10वीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम्स हो रहे हैं। आप भी जब स्कूल में रहे होंगे और बोर्ड की परीक्षाएं दी होंगी तब आपने नोटिस किया होगा कि इस दौरान बहुत कड़ी निगरानी रखी जाती है। निगरानी इतनी कड़ी होती है कि जो बच्चे नकल के लिए चिट का ख्याल भी मन में लाते हैं, उनका वो इरादा सेंटर पर निगरानी देखकर बदल जाता है। कुल मिलाकर बात यह है कि बोर्ड की परीक्षा को बहुत ही गंभीरता से लिया जाता है। सभी क्लास में आपको 2-2 टीचर देखने को मिल जाएंगे। सेंटर के अंदर एंट्री से पहले सभी छात्रों की अच्छे से चेकिंग भी की जाती है। खैर यह सब तो बहुत नॉर्मल सी बात है मगर झारखंड के गढ़वा से एक ऐसा मामला सामने आया है जो आपको हैरान कर देगा।
ऐसा कभी सोचा है आपने?
आपने क्या कभी ऐसा सोचा है कि किसी सेंटर पर एक छात्र की परीक्षा के लिए इतने लोग तैनात कर दिए जाए कि वो परीक्षा कम और युद्ध की ट्रेनिंग ज्यादा लगे। दरअसल एक सेंटर ऐसा है जहां पर सिर्फ एक छात्र के लिए पूरा सिस्टम लगा दिया गया और इसी कारण से यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। आइए आपको बताते हैं कि यह मामला कहां का है और वहां पर ऐसा क्या हुआ।
क्या है यह अनोखा मामला?
आपको बता दें कि यह अनोखा मामला झारखंड के गढ़वा जिले का है जहां पर मैट्रिक की परीक्षा के दौरान सिर्फ एक छात्र के लिए पूरा सिस्टम तैनात कर दिया गया। दरअसल शंकर कुमार सिंह नाम के एक परीक्षार्थी ने संगीत का विषय चुना था और उसका सेंटर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में था। आपको बता दें कि किसी भी दूसरे छात्र ने संगीत का विषय नहीं चुना था जिसके कारण संगीत की परीक्षा देने वाला वो इकलौता छात्र था। अब आमतौर पर ऐसा ही लगता है कि एक छात्र के लिए सेंटर पर ज्यादा लोग नहीं रहेंगे मगर यहां ऐसा नहीं हुआ। उस छात्र की परीक्षा के दौरान सेंटर पर एक मजिस्ट्रेट, 18 निगरानी दल और साथ में 12 पुलिस वाले तैनात रहें। आपको बता दें कि जिस सेंटर पर उस परीक्षार्थी ने परीक्षा दी, उसी स्कूल में 406 छात्रों ने परीक्षा दिया है और अब वहां पर परीक्षाएं खत्म हो चुकी हैं।

