- दो मौतें, 10 दिन की चुप्पी: बलदेव थाने में FIR लंबित, मिलीभगत के आरोपों से घिरी पुलिस—परिवार ने कोर्ट जाने की दी चेतावनी
दैनिक उजाला, मथुरा (बलदेव) : प्रसूता और नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में 10 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज न होने से बलदेव पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के पिता द्वारा दी गई विस्तृत तहरीर के बावजूद अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
अलीगढ़ जनपद के थाना इगलास क्षेत्र निवासी संतोष गौड़ ने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, प्रसव के दौरान घोर लापरवाही और साजिशन मौत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनकी पुत्री का पूर्व में ऑपरेशन से प्रसव हो चुका था, इसके बावजूद दूसरी बार प्रसव पीड़ा होने पर समय रहते विशेषज्ञ अस्पताल नहीं ले जाया गया। पहले घर पर ही प्रयास किया गया, फिर हालत बिगड़ने पर सरकारी एंबुलेंस का इंतजार किया गया और अंततः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां मां और नवजात की मृत्यु हो गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि इतने गंभीर आरोपों और घटनाक्रम के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। परिवार का कहना है कि वे स्वयं न्याय की उम्मीद में करीब 50 किलोमीटर दूर से बार-बार थाने पहुंच रहे हैं, लेकिन पुलिस केवल जांच की बात कहकर टाल रही है। आरोप यह भी है कि ससुराल पक्ष को अब तक थाने बुलाकर सख्ती से पूछताछ तक नहीं की गई, जिससे पुलिस पर मिलीभगत के संदेह गहराने लगे हैं।पीड़ित पक्ष पुलिस से मिलीभगत कर इस मामले को दबाने की कोशिश मान रहा है।
लोगों का कहना है कि जब दो जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं, तब भी यदि पुलिस मुकदमा दर्ज करने में हिचकिचा रही है तो यह न्याय व्यवस्था की गंभीर विफलता है। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष व पारदर्शी विवेचना शुरू नहीं की गई तो वे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलकर शिकायत करेंगे और न्यायालय की शरण लेकर FIR दर्ज कराने का आदेश मांगेंगे।
अब सवाल यह है कि क्या बलदेव पुलिस स्वयं निष्पक्ष कार्रवाई कर भरोसा बहाल करेगी या फिर मामला अदालत की दहलीज तक पहुंचेगा।

