वाशिंगटन डीसी : अमेरिकी केसुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने ट्रम्प के दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध बताया है। साथ ही कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
ट्रम्प ने टैरिफ पर सुनवाई को लेकर कहा था कि अगर केस हारे तो देश बर्बाद हो जाएगा। कोर्ट का यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। एजेंसी AP के मुताबिक, यह मामला ट्रम्प के एजेंडे का पहला बड़ा मुद्दा था, जो सीधे सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा।
दरअसल, अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा दिए थे। टैरिफ का मतलब होता है कि किसी देश से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए, ताकि वह महंगा हो जाए और घरेलू कंपनियों को फायदा मिले।

ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर…
- ट्रम्प के लगाए गए टैरिफ हट जाएंगे।
- अमेरिका को कंपनियों को पैसा वापस करना पड़ सकता है।
- दुनिया के देशों को अमेरिका में सामान बेचने में राहत मिलेगी।
- भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को फायदा होगा।
- कई चीजें सस्ती हो सकती हैं।
- शेयर बाजारों में तेजी आ सकती है।
- दुनिया का व्यापार ज्यादा स्थिर हो सकता है।
ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल किया था
ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था।
इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें।
इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था।

