कासगंज : कासगंज में पत्नी और बच्चों की हत्या के बाद पति फंदे से झूल गया। उसने पहले बच्चों को जहर दिया और फिर पत्नी का गला काट दिया। तीन दिन तक शव घर में पड़े रहे और किसी को इसकी जानकारी नहीं हुई। पड़ोसियों के मुताबिक, घटना का पता उस वक्त चला, जब शनिवार शाम एक युवक शादी का कार्ड देने घर गया।
उसने दरवाजा खटखटाया और नाम लेकर काफी देर तक बुलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उसने आसपास के लोगों से पूछा। तब पता चला कि घर में पिछले तीन दिनों से कोई हलचल नहीं थी। शक के आधार पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने छेनी-हथौड़े से लोहे का दरवाजा काटकर घर के अंदर प्रवेश किया। अंदर पति का शव फंदे से लटका हुआ मिला। बगल में तीनों बच्चों के शव बेड पर थे। उसके नीचे फर्श पर पत्नी का शव पड़ा हुआ था। बच्चों के मुंह से झाग निकल रहा था। मृतकों की पहचान श्यामवीर (50), उसकी पत्नी रामश्री (48), दोनों बेटियां प्राची (12), आकांक्षा (10) और बेटे गिरीश के रूप में हुई है।
पूरा मामला कासगंज कोतवाली क्षेत्र का है। रविवार सुबह परिवार का अंतिम संस्कार हुआ। पति-पत्नी को एक ही चिता पर जलाया गया। जबकि तीनों बच्चों को दफनाया गया। श्यावीर के भाई देशराज ने सभी का क्रियाकर्म किए।
DIG प्रभाकर चौधरी ने बताया कि स्थानीय लोग घटना के पीछे आर्थिक तंगी को वजह बता रहे हैं। मामले की जांच जारी है। पड़ोसियों के अनुसार, परिवार बेटे की न्यूरो समस्या से परेशान था। घर के अंदर का दृश्य देखकर लग रहा था कि कई दिनों से चूल्हा नहीं जला था। वहां कोई बर्तन भी नहीं थे।

रविवार सुबह परिवार का अंतिम संस्कार हुआ। पति-पत्नी को एक ही चिता पर जलाया गया। जबकि तीनों बच्चों को दफनाया गया।

घर के पिछले दरवाजे से पुलिस ने पहले झांककर अंदर देखा।

पुलिस ने छेनी-हथौड़े से लोहे के दरवाजे को काटा, फिर अंदर घुसी।

घर के अंदर चूल्हा देखने से लग रहा था, जैसे कई दिनों से खाना नहीं बना है।
13 साल पहले शादी, 10×10 के कमरे में रहता था परिवार
श्यामवीर की शादी 13 साल पहले नगला वादिक निवासी रामश्री से हुई थी। बेटी प्राची सातवीं, छोटी बेटी आकांक्षा पांचवीं और बेटा गिरीश चौथी कक्षा में पढ़ता था। श्यामवीर की दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। वह मूल रूप से नगला भोजराज गांव का रहने वाला था।
चाचा गया प्रसाद ने बताया कि श्यामवीर अपने भाइयों के साथ वेल्डिंग की दुकान चलाता था, लेकिन बाद में अलग हो गया था। आठ साल पहले वह अमांपुर आकर रहने लगा था। यहां पेट्रोल पंप के पीछे किराये पर एक कमरा लेकर परिवार के साथ रहता था। वह वेल्डिंग का काम करता था। उसके घर में दो रूम थे। आगे वाले में दुकान थी, जबकि पीछे 10×10 के एक छोटे से कमरे में परिवार रहता था।
बेटे की न्यूरो बीमारी से परेशान था
चाचा ने बताया कि श्यामवीर के बेटे गिरीश को न्यूरो की समस्या थी। सिर की नस से जुड़ी बीमारी के कारण उसके इलाज में काफी खर्च हो रहा था। कुछ दिन पहले ही उसने पड़ोसी से एक हजार रुपए उधार लिए थे। उसने लोगों से आर्थिक मदद भी मांगी थी, लेकिन परिवार की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान था।

फोरेंसिक और डॉग स्क्वाड की टीम ने मौके से सूबत जुटाए। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
शादी का कार्ड देने युवक पहुंचा, तब जाकर घटना पता चली
पड़ोसियों ने बताया कि मकान तीन दिन से बंद था। शनिवार को शादी का कार्ड देने एक युवक आया। दरवाजा नहीं खुलने पर उसने लोगों को जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही DIG प्रभाकर चौधरी, DM प्रणय सिंह और SP अंकिता शर्मा मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
SP अंकिता शर्मा ने बताया कि शाम साढ़े छह बजे सूचना मिली थी कि श्यामवीर का परिवार तीन दिन से बाहर नहीं आया है। लोहे का दरवाजा काटकर पुलिस अंदर घुसी, जहां श्यामवीर का शव फंदे से लटका मिला। इसके बाद दरवाजा तोड़कर बाकी शव बाहर निकाले गए।

घटना की जानकारी पर DIG, DM और SP मौके पर पहुंचे। आसपास के लोगों से पूछताछ की।
पिता बोले- बेटे से नहीं बनती थी, चार महीने से बात नहीं हुई
श्यामवीर के पिता नेम सिंह ने बताया कि उनके पास 12 बीघा जमीन थी, जिसका बंटवारा उन्होंने तीन साल पहले अपने चारों बेटों में कर दिया था। उनके तीन बेटे अमांपुर कस्बे में रहते हैं। पिछले चार महीनों से उनकी श्यामवीर से बात नहीं हुई थी, क्योंकि आपसी संबंध ठीक नहीं थे। वहीं, श्यामवीर के ससुराल पक्ष का आरोप है कि पिता ने कभी श्यामवीर की मदद नहीं की।

