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सोनीपत में मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर सीएम फ्लाइंग की रेड:बिना डिग्री के चला रहा था युवक, मरीज मिला भर्ती; अनट्रेंड स्टाफ भी मिली

सोनीपत : सोनीपत जिले के खरखौदा क्षेत्र में हेल्थ व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बिना किसी वैध डिग्री, रजिस्ट्रेशन और अनुमति के एक तथाकथित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल लंबे समय से संचालित किया जा रहा था।

हैरानी की बात यह है कि यहां अनट्रेंड स्टाफ के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा था, वहीं मौके पर दवाइयां, लैब और भर्ती मरीज भी मिले। शिकायत के आधार पर सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।

अनट्रेंड स्टाफ के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा था, वहीं मौके पर दवाइयां, लैब और भर्ती मरीज भी मिले।

अनट्रेंड स्टाफ के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा था, वहीं मौके पर दवाइयां, लैब और भर्ती मरीज भी मिले।

सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से खरखौदा के बाल्मीकि मंदिर, दिल्ली चौक के पास स्थित पीसी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान टीम को कई अनियमितताएं मिली, जिससे स्पष्ट हुआ कि अस्पताल अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।

जीएनएम कोर्स करने वाला चला रहा था हॉस्पिटल

जांच में सामने आया कि अस्पताल को गांव पाई के अनिल संचालित कर रहा था, जिसने केवल 12वीं के बाद जीएनएम (नर्सिंग) का कोर्स किया हुआ है। उसके पास अस्पताल चलाने के लिए न कोई वैध डिग्री, न रजिस्ट्रेशन और न ही कोई जरूरी दस्तावेज मौके पर मौजूद थे।

जांच में सामने आया कि अस्पताल को गांव पाई निवासी अनिल संचालित कर रहा था, जिसने केवल 12वीं के बाद जीएनएम (नर्सिंग) का कोर्स किया हुआ है

जांच में सामने आया कि अस्पताल को गांव पाई निवासी अनिल संचालित कर रहा था, जिसने केवल 12वीं के बाद जीएनएम (नर्सिंग) का कोर्स किया हुआ है

छापेमारी के दौरान गांव निलोठी की एक महिला मरीज को सांस की बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती पाया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि वहां कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था और मरीजों का इलाज अनट्रेंड स्टाफ द्वारा किया जा रहा था।

अनट्रेंड स्टाफ और बिना अनुमति लैब का संचालन

टीम को मौके पर पांच अन्य कर्मचारी भी मिले, जिनके पास किसी प्रकार की मेडिकल डिग्री या प्रशिक्षण नहीं था। इसके अलावा अस्पताल में एक लैब भी संचालित की जा रही थी, जहां विभिन्न प्रकार के टेस्ट किए जा रहे थे। जांच में पता चला कि लैब को दीपक नामक व्यक्ति चला रहा था, जो राठधाना निवासी सुनील के लाइसेंस का इस्तेमाल कर रहा था।

सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया।

सीएम फ्लाइंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया।

अस्पताल में बिना अनुमति दवाइयां रखी गई थीं और मरीजों से इलाज के दौरान ही दवाइयों और फीस का पैसा वसूला जा रहा था। यह पूरा काम बिना किसी नियम-कानून के किया जा रहा था, जिससे मरीजों की जान को खतरा बना हुआ था।

अस्पताल सील करने की तैयारी, सामान किया जाएगा जब्त

जानकारी के अनुसार, यह अस्पताल वर्ष 2021 से लगातार संचालित किया जा रहा था। इसके लिए करीब 40 हजार रुपये मासिक किराए पर बिल्डिंग ली गई थी, जहां बिना किसी वैध अनुमति के स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही थी।सीएम फ्लाइंग टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचना दे दी है। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा।

साथ ही अस्पताल को सील करने और दवाइयों सहित अन्य सामान को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

जानलेवा हो सकता था इलाज- डॉक्टर

खरखौदा के हेल्थ विभाग के डॉक्टर धीरज का का कहना है कि इस तरह अनट्रेंड स्टाफ द्वारा मरीजों का इलाज करना बेहद खतरनाक है और इससे किसी भी मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। छापेमारी में सीएम फ्लाइंग के इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह, सब इंस्पेक्टर जितेंद्र (सीआईडी), सब इंस्पेक्टर राजेश (सीएम फ्लाइंग), ड्रग्स इंस्पेक्टर मुनीराम और खरखौदा सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टर धीरज सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है और आगे सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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