- मथुरा बीएसए ने अपने आप पर अभद्रता का आरोप लगाकर वेतन मांगने आई शिक्षिक को किया निलंबित, लेकिन रजनीतिज्ञ बने परिषदीय शिखक आखिर बीएसए क्यों मौन ?
मथुरा: जिले में बेसिक शिक्षा का जो हाल ए बेहाल है उसमें सीधे तौर पर जिले के ही शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है।
बीते दिन एक शिक्षिका वेतन की गुहार लगाने बीएसए कार्यालय पहुंचती है, उसकी समस्या का समाधान तो बहुत दूर बल्कि उस पर ही बीएसए ने आरोप लगाकर उसे निलंबित कर चुप करा दिया। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि शिक्षक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रश्न यह भी उठता है कि प्रतिदिन स्कूल पहुंचने वाली शिक्षिका पर तो तत्काल कार्यवाही को अमल में लाया गया, लेकिन नौहझील ब्लाॅक के भैरई जूनियर हाईस्कूल में तैनात सहायक अध्यापक रामटोर पांडेय पिछले 9 वर्षों से स्कूल की राह को भूल राजनीति कर रहे हैं। इस शिक्षक पर अब तक कार्यवाही क्यों नहीं अमल में लायी गयी। क्या जिले के शिक्षा अधिकारी की इस राजनीतिज्ञ शिक्षक से कोई सांठ-गांठ है ?
राजनीतिज्ञ शिक्षक के खिलाफ शासन से लेकर प्रशासन तक सैकड़ों शिकायतें लंबित चल रही हैं। यही नहीं नौहझील ब्लाॅक के एआरपी और बीईओ जांच के दौरान शिक्षक की उपस्थिति दिखाने के लिए उसे फोन पर ही बुलाकर स्कूल में फोटो खिंचाकर शिकायत को बंद कर देते हैं। हाल ए बेहाल यह है कि पिछले 9 वर्षों बीईओ से लेकर जिले के शिक्षा अधिकारियों ने कभी भी इस शिक्षक के खिलाफ कार्यवाही तक करने की सोची भी नहीं।
खुलकर राजनीति पर उतारू शिक्षक रामकटोर के खिलाफ राजनीति के सबूत ढूंढने की कोई जरूरत भी नहीं है, क्योंकि इस शिक्षक की फेसबुक स्वयं बयां करती है कि शिक्षक परिषदीय स्कूल की राह को भूलकर किस प्रकार बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालकर अधिकारियों और राजनेताओं के साथ कार्यक्रमों में फोटो खिंचवाकर राजनीति करता है।
एडवोकेट कुलदीप पांडेय कहते हैं कि हाथरस जिले में तैनात एक शिक्षक के खिलाफ अपनी के पक्ष में प्रचार करने पर कार्यवाही हो चुकी है, लेकिन मथुरा बीएसए ने रामकटोर पांडेय के खिलाफ कोई कार्यवाही अभी तक नहीं की। जबकि परिषदीय शिक्षक रामकटोर ने गोकुल चेयरमैन प्रत्याशी के पक्ष खुलकर चुनाव प्रचार किया, जिसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से लेकर शासन और प्रशासन को की जा चुकी है। इस संबंध में खुद बीएसए को भी जानकारी है।

