चंडीगढ़ : ‘जिस बेटे को जन्म दिया, उसकी जिंदगी बचाने के लिए मां ने अपनी किडनी भी दे दी। मगर, मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल में कराए ट्रांसप्लांट के बाद किडनी फेल हो गई। अल्ताफ की तबीयत बिगड़ती चली गई तो पिता उसे लेकर चंडीगढ़ PGI पहुंचे।
यहां वह करीब 8 दिन भर्ती रहा, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। अब हर तीसरे दिन बाहर से डायलिसिस करानी पड़ रही है। परिवार अब हर तीसरे दिन 500 रुपए में सस्ते डायलिसिस के लिए PGI पहुंचता है, लेकिन नंबर नहीं आता तो 3 हजार में बाहर से डायलिसिस करानी पड़ती है।
इलाज के बढ़ते खर्च के बीच परिवार को अपनी एक बीघा जमीन तक बेचनी पड़ी। PGI के बाहर खड़े अल्ताफ और उसके पिता से बातचीत में उनकी पूरी कहानी सामने आई।

अल्ताफ का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया, लेकिन वह फेल हो गया।
अल्ताफ बिजनौर (उत्तर प्रदेश) की नजीबाबाद तहसील का रहने वाला है। वह करीब 5 साल तक अबू धाबी में ड्राइवर का काम करता रहा। शुरुआत में उसे 20 हजार रुपए महीने मिलते थे। भारत वापस आने के समय उसकी कमाई करीब 25 हजार रुपए महीना थी। अल्ताफ की शादी हो चुकी है, लेकिन उसके कोई बच्चा नहीं है।
अचानक पैर में दर्द से बीमारी का पता चला
एक दिन अचानक उसके पैर में दर्द हुआ। इसके बाद पैर पर सूजन आ गई। अबू धाबी में उसका इलाज कराया गया। वहां से डिस्चार्ज होने के बाद परिवार उसे भारत वापस ले आया। बिजनौर में जांच कराई गई तो पता चला कि उसकी किडनी में परेशानी है।
मां ने किडनी देने का फैसला किया
किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत सामने आने पर अल्ताफ की मां शेरूनिका ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। परिवार के मुताबिक, ट्रांसप्लांट से पहले शेरूनिका की किडनी में पथरी थी। पिता शाहिद ने डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी थी।
अक्टूबर 2025 में मोहाली में हुआ ट्रांसप्लांट
अक्टूबर 2025 में मोहाली के एक निजी अस्पताल में अल्ताफ का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। परिवार के मुताबिक, ट्रांसप्लांट पर करीब 7 लाख रुपए खर्च हुए। ट्रांसप्लांट के बाद परिवार को उम्मीद थी कि अल्ताफ की हालत सुधरेगी और वह सामान्य जिंदगी में लौट सकेगा, लेकिन कुछ समय बाद उसकी हालत फिर बिगड़ने लगी। परिवार के मुताबिक, प्रत्यारोपित किडनी फेल हो गई।
इलाज के लिए PGI पहुंचे
अल्ताफ की हालत बिगड़ने के बाद परिवार जुलाई 2026 में उसे चंडीगढ़ के PGI लेकर पहुंचा। वह करीब 8 दिन PGI में भर्ती रहा। इसके बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद भी उसे डायलिसिस की जरूरत बनी रही। अब परिवार बाहर के सेंटर में उसकी डायलिसिस करवाता है। हर तीसरे दिन डायलिसिस होती है और एक बार में करीब 3 हजार रुपए खर्च होते हैं। अल्ताफ बोल नहीं पाता, इसलिए उसकी रोजमर्रा की जरूरतों और परेशानी को परिवार उसके इशारों और हालत से समझता है।
किडनी देने के बाद मां की तबीयत भी खराब
अल्ताफ की मां शेरूनिका की तबीयत भी अब अक्सर खराब रहती है। परिवार के मुताबिक, उनके पेट में दर्द रहता है और बीच-बीच में बुखार भी आता रहता है। एक तरफ अल्ताफ का इलाज चल रहा है। दूसरी तरफ शेरूनिका की सेहत भी परिवार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पिता शाहिद दोनों की देखभाल कर रहे हैं।
कभी अबू धाबी में ड्राइवर की नौकरी करने वाला अल्ताफ अब लगातार इलाज पर निर्भर है। परिवार के मुताबिक, ट्रांसप्लांट और उसके बाद के इलाज में करीब 9.5 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा एक बीघा जमीन भी बेचनी पड़ी। अब हर तीसरे दिन करीब 3 हजार रुपए की डायलिसिस होती है। अल्ताफ बोल नहीं पाता। पिता शाहिद उसके इलाज और खर्च का इंतजाम कर रहे हैं। परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इलाज को लगातार जारी रखना है।

