- जन्माष्टमी में मथुरा जगमगाया, बलदेव छठ पर सन्नाटा! सरकार-प्रशासन से उठे सवाल
दैनिक उजाला, मथुरा/बलदेव : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा शहर से लेकर प्रमुख चौराहों तक सजावट और रोशनी से धार्मिक नगरी को भव्य रूप दिया गया, लेकिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलभद्र के जन्मोत्सव बलदेव छठ को लेकर बलदेव नगर में अभी तक वैसी कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। 17 सितंबर को होने वाले ऐतिहासिक बलदेव छठ महोत्सव को लेकर कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं और गुरुवार से भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है, बावजूद इसके नगर की साज-सज्जा और श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां सवालों के घेरे में हैं।
बलदेव की पहचान केवल स्थानीय कस्बे के रूप में नहीं, बल्कि भगवान बलभद्र की पावन जन्मभूमि और धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में है। बलदेव छठ पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान बलभद्र के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व पर नगर की बदहाल व्यवस्थाएं और सजावट का अभाव प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है।
बलदेव छठ की परंपराओं का अपना विशेष महत्व है। विवाह के बाद दूल्हे के सेहरे को बलभद्र जी के क्षीर सागर पर प्रवाहित की परंपरा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है। इसके अलावा जगह-जगह बायगीर मेले लगते हैं और सर्पदंश से संबंधित पारंपरिक मान्यताओं के तहत लोगों के बंद खोले जाने की रस्म भी होती है। इन आयोजनों में आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं।
जन्माष्टमी में करोड़ों की व्यवस्थाएं, बलदेव छठ में क्या कसूर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नगर को सजाने, रोशनी करने और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जाती हैं, तो भगवान बलभद्र के जन्मोत्सव पर बलदेव नगर को उसके धार्मिक महत्व के अनुरूप क्यों नहीं सजाया जाता?
क्या बलदेव छठ का महत्व केवल मंदिर परिसर तक सीमित मान लिया गया है? क्या नगर के प्रवेश मार्ग, प्रमुख चौराहे, बाजार और धार्मिक स्थलों को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाने की जिम्मेदारी किसी की नहीं है? लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के मद्देनजर सफाई, प्रकाश, पेयजल, यातायात और सुरक्षा की तैयारियां कितनी हुई हैं—इसका भी जवाब जनता चाहती है।
विधानसभा चुनाव से पहले बलदेव की आवाज सुनेंगे जनप्रतिनिधि?
बलदेव क्षेत्र की जनता का सवाल अब सीधे शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से है। बलदेव विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक से भी लोगों को उम्मीद है कि वह इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन की ओर ध्यान देंगे और शासन स्तर पर बलदेव छठ को उसकी गरिमा के अनुरूप पहचान दिलाने की पहल करेंगे।
बलदेव विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र पांडेय का कहना है कि बलदेव छठ केवल एक स्थानीय धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ब्रज की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। दूर-दराज के राज्यों और जिलों से श्रद्धालु यहां आते हैं। इसके बावजूद हर वर्ष बलदेव नगर की सजावट और मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि बलदेव छठ को केवल मंदिर तक सीमित न रखकर पूरे नगर को धार्मिक उत्सव की तरह सजाया जाए और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा को जन्माष्टमी पर भव्य रूप दिया जा सकता है, तो भगवान बलभद्र के जन्मोत्सव पर बलदेव की उपेक्षा क्यों? शासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस अंतर को समझना होगा। बलदेव की धार्मिक पहचान को मजबूत करने के लिए स्थायी स्तर पर भी योजना बनाई जानी चाहिए।
अब भी समय है, जाग जाए प्रशासन
बलदेव छठ महोत्सव शुरू हो चुका है और गुरुवार से भागवत कथा भी प्रारंभ होने जा रही है। ऐसे में प्रशासन के पास अब भी समय है कि नगर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सजावट, यातायात प्रबंधन, पेयजल और श्रद्धालुओं की अन्य सुविधाओं की तत्काल समीक्षा करे।
सवाल यह है कि क्या इस बार बलदेव छठ पर बलदेव नगर भी मथुरा की तरह सजेगा, या भगवान बलभद्र का जन्मोत्सव एक बार फिर सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर रह जाएगा?

