सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराने के मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मस्जिद कमेटी को अंतरिम राहत देते हुए 6.41 करोड़ रुपए के जुर्माना वसूलने पर रोक लगा दी। साथ ही, कोर्ट ने अगले तीन हफ्तों में सरकार को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिका पर सुनवाई जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। 9 सितंबर को मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि प्रशासन ने पर्याप्त कानूनी नोटिस और वैध ध्वस्तीकरण आदेश के बिना 5 सितंबर को कार्रवाई की।
इधर, ध्वस्तीकरण के 6 दिन बाद जुमे की नमाज को देखते हुए सहारनपुर में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात की गई। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जिले में हाईअलर्ट रहा। PAC और RRF के करीब 1000 जवानों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। भीड़भाड़ वाले स्थानों और प्रमुख मस्जिदों के आसपास ड्रोन से निगरानी की गई।
नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों में पहुंचे। जामा मस्जिद में करीब 150 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। मस्जिद के आसपास करीब 20-20 मीटर की दूरी पर जवान तैनात रहे। पुलिस का कहना है कि जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था को एहतियात के तौर पर मजबूत रखा गया था।

जामा मस्जिद में जुमे की नमाज को देखते हुए आसपास के इलाकों की ड्रोन से निगरानी की गई।

मस्जिद के बाहर और मार्केट एरिया में पुलिस अधिकारियों के साथ फोर्स भी तैनात की गई।

मस्जिद से एक किलोमीटर के क्षेत्र में पीएसी के जवान तैनात किए गए।
5 सितंबर को ढहाई गई मस्जिद, नीचे मिला कुआं
सहारनपुर में 5 सितंबर को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को अवैध बताते हुए गिरा दिया था। 16 घंटे तक 6 बुलडोजर चले। रविवार सुबह मलबा हटाने पर नीचे कुआं मिला। सोमवार सुबह ASI की टीम जांच के लिए पहुंची। 3 अफसरों ने कुएं के अंदर उतरकर जांच की और फीता डालकर गहराई मापी। अफसर ने कहा- कुआं 200 से 250 साल पुराना हो सकता है।
प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद गिराई गई। मस्जिद पक्ष का आरोप है कि उसे हाईकोर्ट में अपील का मौका नहीं दिया गया। वकील बाबर वसीम ने कहा- कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। मस्जिद की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया- यहां पहले मंदिर रहा होगा। उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई।

5 सितंबर को मस्जिद ढहाई गई थी। 16 घंटे में 6 बुलडोजर ने मस्जिद को जमींदोज कर दिया था।

मस्जिद का मलबा हटाने के बाद एक कुआं मिला था। ASI अफसर ने कहा था- कुआं 200 से 250 साल पुराना हो सकता है।
क्यों गिराई गई मस्जिद?
- कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद 3300 स्क्वायर फीट में बनी हुई थी। दो मंजिला मस्जिद में 2 बड़े हॉल समेत 5 कमरे थे। ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल और दो कमरे थे। पहली मंजिल पर हॉल के साथ एक बड़ा कमरा था। कमरे में डाकघर चलता था।
- 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद को अवैध बताते हुए डीएम से शिकायत की थी। मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट को जांच के आदेश दिए। जांच में मस्जिद अवैध पाई गई।
- 24 मार्च, 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की। 16 जुलाई, 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध माना और उसे हटाने के साथ 6.41 करोड़ रुपए की हर्जाना वसूलने का आदेश दिया। कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया।
- 20 जुलाई को मस्जिद पक्ष ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की। 24 जुलाई को जिला कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले पर स्टे देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई। 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के ध्वस्तीकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी।

