नई दिल्ली : BRICS समिट शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। भारत में होने वाले BRICS समिट में 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में हुए BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे।
समिट में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के नेता भी शामिल होंगे। BRICS की ताकत को सिर्फ सदस्य देशों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी आबादी और अर्थव्यवस्था से भी समझा जा सकता है।
11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है।
अर्थव्यवस्था की बात करें तो PPP यानी खरीदने की क्षमता के आधार पर BRICS देशों की कुल अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब 3 गुना है।

गोवा में ब्रिक्स समिट से पहले 15 अक्टूबर 2016 को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारतीय अंदाज के कपड़ों में नजर आए थे।
PM मोदी 4 वर्ल्ड लीडर्स से मिलेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
- सुबह 10 बजे- हैदराबाद हाउस में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली।
- सुबह 10:30 बजे- मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम।
- सुबर 11 बजे- अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद।
- सुबह 11:30 बजे- वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग।
- शाम 6 से 7 बजे*- भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है।
दिल्ली में तैनात पुलिस वाहनों की भी स्निफर डॉग से जांच
दिल्ली में BRICS समिट को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा में तैनात पुलिस वाहनों की भी स्निफर डॉग से जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए वाहनों की बारीकी से जांच कर रही हैं।




चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली के लिए रवाना
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार सुबह नई दिल्ली के लिए रवाना हुए। वे 18वें BRICS समिट में शामिल होंगे। समिट से इतर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात होगी।
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। करीब 7 साल बाद उनका भारत दौरा हो रहा है।
जिनपिंग का गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी।
गलवान के बाद करीब 4 साल तक LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव रहा। अब भारत और चीन LAC से लेकर कारोबार तक 6 बड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
इनमें सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश सीमा विवाद पर एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। अब इन फैसलों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है।
दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच कारोबार है। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इससे भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा।

प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग 11 अक्टूबर, 2019 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ‘कृष्णाज बटर बॉल’ पर। यह जिनपिंग की आखिरी भारत यात्रा थी।
पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती
BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं।
साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है।
इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए।
इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है।
ब्रिक्स तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन
BRICS 11 देशों का ऐसा समूह है, जिसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।
BRICS का मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है।
शुरुआत में इसमें 4 देश थे और इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। बाद में दूसरे देश जुड़ते गए और इसका नाम BRICS हो गया। भारत 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है।

