- स्वर्गीय श्री सुरेश चंद्र अग्रवाल की 75वीं जन्म जयंती पर अविस्मरणीय आयोजन; जीवन यात्रा पर आधारित बायोपिक ने किया भावुक, आशुतोष राणा के सशक्त अभिनय ने जीता दिल, भव्य सजावट और आत्मीय आतिथ्य की हुई सराहना
मथुरा : धर्मनगरी वृंदावन मंगलवार की शाम एक ऐसी भावपूर्ण एवं अविस्मरणीय सांस्कृतिक संध्या की साक्षी बनी, जिसमें श्रद्धा, स्मृतियों, भक्ति और रंगमंच की उत्कृष्ट कला का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्वीटी बाय एम. आर. ग्रुप के संस्थापक स्वर्गीय श्री सुरेश चंद्र अग्रवाल जी की 75वीं जन्म जयंती के अवसर पर स्वामी हरिदास ऑडिटोरियम, गीता शोध संस्थान में आयोजित प्रसिद्ध नाट्य प्रस्तुति ‘हमारे राम’ ने दर्शकों के हृदय पर गहरी छाप छोड़ी।
अपने पूजनीय संस्थापक की स्मृतियों को समर्पित इस विशेष आयोजन में जहां उनके प्रेरणादायी जीवन, संघर्षों और संस्कारों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई, वहीं भगवान श्रीराम के आदर्शों पर आधारित भव्य नाट्य मंचन ने पूरी संध्या को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ स्वर्गीय सुरेश चंद्र अग्रवाल जी की धर्मपत्नी श्रीमती रजनी अग्रवाल, पुत्र श्री सुनील कुमार अग्रवाल, पौत्र श्री लव कुमार बंसल तथा छोटे भाई श्री बनवारी लाल अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती लता अग्रवाल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

लव कुमार बंसल ने किया आत्मीय स्वागत, दादाजी की स्मृतियों और पारिवारिक संस्कारों को किया नमन
दीप प्रज्वलन के पश्चात एम. आर. ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर लव कुमार बंसल ने सभागार में उपस्थित पूज्य संत-महात्माओं, विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों का आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर उन्होंने अपने पूजनीय दादाजी सुरेश चंद्र अग्रवाल जी के प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन मूल्यों और परिवार से जुड़ी भावपूर्ण स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने दादाजी की सादगी, कर्मठता, दूरदर्शिता और पारिवारिक संस्कारों का उल्लेख करते हुए उनके जीवन को संघर्ष, संकल्प और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल बताया।
साथ ही उन्होंने अपने पिता श्री सुनील कुमार अग्रवाल जी से मिले मार्गदर्शन, पारिवारिक मूल्यों और पीढ़ियों से चली आ रही संस्कारों की विरासत का भी उल्लेख किया। उनके उद्बोधन में अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान, परिवार के प्रति आत्मीयता और उन जीवन मूल्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का आधार बनते हैं।
जीवन यात्रा पर आधारित बायोपिक ने किया भावुक, संघर्ष और संस्कारों की स्मृतियां हुईं जीवंत
स्वागत उद्बोधन के पश्चात स्वर्गीय सुरेश चंद्र अग्रवाल जी के जीवन पर आधारित लगभग 15 मिनट की विशेष बायोपिक प्रदर्शित की गई। इसमें उनके जीवन के संघर्षों, अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प, पारिवारिक मूल्यों और सफलता की प्रेरणादायी यात्रा को अत्यंत संवेदनशील एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।
पर्दे पर उनकी जीवन यात्रा के विभिन्न पड़ावों, पारिवारिक स्मृतियों और संघर्ष से सफलता तक की कहानी को देखकर सभागार में उपस्थित अनेक लोग भावुक हो उठे। कुछ क्षण ऐसे भी आए, जब दर्शकों की आंखें नम हो गईं, जबकि उनके जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
यह बायोपिक केवल एक सफल उद्यमी के जीवन का परिचय नहीं थी, बल्कि उन संस्कारों, रिश्तों और मानवीय मूल्यों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति थी, जिनके आधार पर उन्होंने अपने परिवार और व्यवसाय की मजबूत नींव रखी। उनकी स्मृतियों को समर्पित यह प्रस्तुति आयोजन के सबसे आत्मीय और भावुक क्षणों में से एक रही।
आशुतोष राणा के प्रभावशाली अभिनय ने बांधा समां, ‘हमारे राम’ के मंचन में जीवंत हुए रामायण के प्रसंग
बायोपिक के पश्चात फेलिसिटी थिएटर की बहुचर्चित नाट्य प्रस्तुति ‘हमारे राम’ का भव्य मंचन हुआ। भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, मर्यादाओं और मानवीय मूल्यों को जिस कलात्मक संवेदनशीलता और प्रभावशाली शैली में मंच पर प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों को प्रारंभ से अंत तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा।
प्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा ने रावण के चरित्र को अपने सशक्त अभिनय, गंभीर आवाज और प्रभावशाली संवाद अदायगी से जीवंत कर दिया। उनके अभिनय में रावण का अहंकार, विद्वत्ता, पराक्रम और आंतरिक द्वंद्व जिस गहराई के साथ उभरकर आया, उसने दर्शकों पर विशेष प्रभाव छोड़ा। मंच पर उनकी प्रभावशाली उपस्थिति और संवादों की गूंज ने प्रस्तुति को एक अलग ऊंचाई प्रदान की।
वहीं, राहुल आर. भूचर ने भगवान श्रीराम के रूप में मर्यादा, करुणा, त्याग और आदर्शों की सुंदर अभिव्यक्ति की। अभिनेता तरुण खन्ना सहित अन्य कलाकारों ने भी अपने प्रभावशाली अभिनय से रामायण के विभिन्न पात्रों को जीवंत कर दिया।
मनमोहक संगीत, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, भव्य मंच सज्जा और आधुनिक तकनीकी प्रभावों ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया। लगभग तीन घंटे तक चले इस मंचन में कई प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर किया, तो अनेक दृश्यों पर सभागार तालियों से गूंज उठा। भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत इस प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति की गहराइयों से जोड़ दिया।

