कुरुक्षेत्र : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार को हरियाणा के दौरे पर रहीं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हुए हीरक जयंती समारोह में उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में गीता का संदेश इसी धरती से पहुंचा। आजादी की लड़ाई में हरियाणा के लोगों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
उन्होंने कहा, “मुझे बताया गया कि 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में रेवाड़ी की 12 साल की बेटी ने नमक कानून तोड़ा और उसमें अपनी सारी बचत लगा दी।” खेल उपलब्धियों पर राष्ट्रपति ने मनु भाकर, स्वीटी बूरा और जैस्मिन लंबोरिया का जिक्र करते हुए कहा कि ये देश का गौरव हैं।
इससे पहले उन्होंने रविवार सुबह उन्होंने शक्तिपीठ देवीकूप भद्रकाली मंदिर में देशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री नायब सैनी और राज्यपाल असीम घोष उनके साथ रहे।
यहां से वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (KU) पहुंचीं, जहां हीरक जयंती समारोह का लोगो लॉन्च किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने गुरुकुल में हुए स्वामी श्रद्धानंद के 100वें बलिदान दिवस पर कार्यक्रम शिरकत की। यहां उन्होंने स्टूडेंट्स को संदेश दिया-

कैसी भी परिस्थिति हो बारिश हो, आंधी हो, तूफान और धूप हो, हम डटे रह सकते हैं। ये आत्म सुधार, शारीरिक और मानसिक सुधार के लिए ये भी शिक्षा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रिमोट का बटन दबाकर हीरक जयंती समारोह के LOGO को लॉन्च किया।

राष्ट्रपति को पोट्रेट भेंट करता मुन्नारेड़ी गांव का छात्र चेतन अत्री।
चेतन ने राष्ट्रपति को उनका पोट्रेट भेंट किया, एक सप्ताह में तैयार की
कैथल जिले के मुन्नारेड़ी गांव के रहने वाले चेतन अत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एक सुंदर स्केच (सिलहौटी स्केच) बनाया। इस स्केच को तैयार करने में उन्हें लगातार एक हफ्ते तक दिन-रात मेहनत करनी पड़ी।
जब चेतन को राष्ट्रपति से मिलने का मौका मिला, तो उन्होंने यह स्केच राष्ट्रपति जी को भेंट किया। राष्ट्रपति जी को यह स्केच बहुत पसंद आया और उन्होंने चेतन की तारीफ की। इसके बाद उन्होंने चेतन से उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा, जिस पर चेतन ने बताया कि वे डीएवी पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं।
चेतन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्थानीय सांसद और प्रशासन का भी धन्यवाद किया, जिनकी वजह से उन्हें राष्ट्रपति जी से मिलने और सम्मानित होने का यह सुनहरा अवसर मिला।
राष्ट्रपति का स्टूडेंट्स को संदेश- कैसी भी परिस्थिति हो, डटे रहना
राष्ट्रपति बोलीं- मैं देख रहीं हूं कि बच्चे धूप में बैठे हैं, लेकिन कैसी भी परिस्थिति हो बारिश हो, आंधी हो, तूफान और धूप हो, हम डटे रह सकते हैं। ये आत्म सुधार, शारीरिक और मानसिक सुधार के लिए ये भी शिक्षा है। कहा कि कोई भी कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता है। हर कार्य का अपना महत्व होता है। हमें अपना काम पूर निष्ठा, इमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए।

