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Fri. Feb 13th, 2026

विद्यार्थी के जीवन में अच्छे जीवनसाथी की भूमिका महत्वपूर्ण : नीरज

  • ‘‘ओरिएंटेशन’’ के साथ जीएलए में 26वां शैक्षणिक सत्र शुरू

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा का 26वां शैक्षणिक सत्र ‘‘ओरिएंटेशन’’ कार्यक्रम के साथ शुरू हुआ। ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता, सीईओ नीरज अग्रवाल, प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने मां सरस्वती एवं प्रेरणास्त्रोत स्व. गणेशीलाल अग्रवाल के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर की। तत्पश्चात निनाद क्लब के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता ने नवागन्तुक छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों को जीएलए में प्रवेश पर बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जीएलए की जो पहचान है वह छात्र-छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण है। जीएलए का एक ही ध्येय है कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास एवं सर्वश्रेष्ठ रोजगार। उन्होंने नवागन्तुक विद्यार्थियों को ओरिएंटेशन कार्यक्रम का महत्त्व समझाते हुए छात्रों को बताया कि आज से छात्रों को जीएलए में चार साल अपनी जिंदगी को संवारने में बिताने हैं। इसके बाद बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियों को समझते हुए उस राह की ओर अग्रसर होना है। प्रत्येक माता-पिता का यही सपना होता है कि उसका बच्चा पढ़े और पढ़कर आगे बढ़े और जीएलए भी यही चाहता है कि उसके यहां पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र रोजगारपरक और उद्यमी बने, जिससे विश्वविद्यालय का नाम रोशन हो।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने विद्यार्थियों से राधे-राधे के साथ अपना संबोधन शुरू करते हुए कहा कि आज आप सभी परम्परागत पाठ्यक्रम के बाद तकनीकी एवं व्यवसायिक पाठयक्रम से जुड़ गए हैं, जो आपके जीवन को नई दिशा प्रदान करेगा। यानि अब विद्यार्थी जीवन के उस रास्ते की शुरुआत करने जा रहे हैं जहाँ से काबिलियत हासिल कर निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करना है। ओरिएंटेशन प्रोग्राम के माध्यम से विश्वविद्यालय की विशेषताओं और यात्रा से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

कुलसचिव ने कहा कि यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि विश्वविद्यालय का यह वर्ष सिल्वर जुबली वर्ष है। जब हम विश्वविद्यालय के 25 वर्षों को पूरा कर रहे है। हम सभी ने इन 25 वर्षों में न केवल अपने विद्यार्थियों को उच्चतम शैक्षिक मानकों तक पहुंचाया, बल्कि उन्हें एक समृद्धि से भरपूर जीवन जीने के लिए तैयार किया है। वहीं मंच पर उपस्थित विश्वविद्यालय के अल्यूमनस कमलेन्द्र त्रिपाठी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दूसरी बात आपको बताते हुए आपार ख़ुशी हो रही है एक गांव से निकला हुआ लड़का विश्वविद्यालय का पुरातन छात्र अल्यूमनस) विश्व प्रसिद्ध संस्था इसरो में डायरेक्टर के पद पर अपना योगदान दे रहा है। जो आज हमारे बीच में उपास्थित रहा है। इसी बीच तालियों की गड़गड़ाहट ने इसरो के डायरेक्टर का स्वागत किया।

विश्वविद्यालय के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नीरज अग्रवाल ने विद्यार्थियों को ओलंपिक चैंपियन विल्मा रूडोल्फ, ऑस्ट्रियन अमेरिकी बाॅडीबिल्डर अर्नोल्ड श्वार्जनेगर, मार्टिन लूथर किंग, मुल्ला नसरूद्वीन, दशरथ राम मांझी, माइकल बोल्टन एवं पाब्लो पिकासो (चित्रकार) आदि से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से प्रेरित किया। इसके अलावा उन्होंने मेंढकों एक कहानी पर प्रकाश डालते हुए अपने अंदाज में बताया कि एक दिन मेंढकों की रेस हो रही थी, उसमें कोई कह रहा था अरे यह पूरा नहीं हो पायेगा, लेकिन एक मेंढक उनमें बिल्कुल बहरा था, यानि वह किसी की नहीं सुन रहा था। इसके बाद फिर क्या उसने लक्ष्य को हासिल करते हुए वह पेड़ पर चढ़ गया। उन्होंने इस अंदाज को बयां करते हुए कहा कि लोग आपसे कहेंगे कि आप यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते हैं। आपको न नहीं सुनना है और मेंढक की तरह अनसुना बनकर लक्ष्य को साध लेना है।

इसके बाद उन्होंने महान चित्रकार पोब्लो पिकासो (चित्रकार) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक महिला चित्रकार से एक पेटिंग बनवाने के लिए के लिए गई। महिला की पेंटिंग को चित्रकार ने दो मिनट में बनाकर तैयार कर दिया। तैयार हुई पेटिंग पर महिला ने थोड़ी अनभिज्ञता जाहिर की तो, चित्रकार ने कहा कि इसकी कीमत 50 लाख से अधिक है। महिला ने जब उस पेंटिंग को दूसरे त्रिकार को दिखाया तो, उसने कीमत 50 लाख रूपये लगाई। फिर से महिला पिकासो चित्रकार के पास पहुंची और बोली कि ऐसी पेंटिंग बनाना सिखा दीजिए। इस पर चित्रकार ने कहा कि इस दो मिनट की पेंटिंग को सीखने में मुझे 40 साल लगे। यानि विद्यार्थियों को लक्ष्य हासिल करने में समय लग सकता है, लेकिन हार नहीं माननी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरणादायक स्लाइडस दिखाईं। स्लाइडस के माध्यम से बताया जब तक विद्यार्थी के पास ‘रोलेक्स‘ न हो तो आराम करना सही नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने एक सफल दिव्यांग की फोटो दिखाते हुए कहा कि यकीन मानिए कोई भी उम्मीद खो देना, हाथ पांव खो देने से कहीं अधिक बुरा है। उन्होंने अपने संबोधन को अंतिम रूप देते हुए कहा कि प्रत्येक के जीवन में जीवनसाथी बहुत अधिक महत्व रखता है। इसलिए सही साथी चुनेंगे तो, सदमार्ग दिखाई देगा। आज से सभी विद्यार्थियों का नया दिन और नया समय है, इसलिए अपने जीवन में नया रंग भरने की पूर्ण कोशिश करें।

प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि मोटीवेट हो जाना एक अलग बात है और हमें लगता है कि हम यह कर लेंगे, लेकिन जब बारी आती है अगले दिन सुबह करने की तो, फिर हम नहीं कर पाते हैं, ऐसा अक्सर होता है। इसलिए मोटिवेशन उतना ही काफी है जितना विद्यार्थी रिटेन कर सके। आपने कितना रिटेन किया, यह आने वाले समय में पता लगेगा जब आपके आचरण को और पढ़ाई को विश्वविद्यालय नोटिस करेगा। उन्होंने कहा कि जब एक रिसर्च क्वांटम लर्निंग में पब्लिश हुई। उसमें कहा गया है कि जो भी हम सुनते हैं, उसका केवल 10 प्रतिशत याद रहता है। अगर कोई एक घंटे का भाषण सुनता है तो उसे 10 प्रतिशत तक याद रहता है। जो पढ़ते हैं उसका 20 प्रतिशत, आप जो देखते हैं उसका 30 से 50 प्रतिशत, जो कहा जाता है उसका 70 प्रतिशत और जो कहते और करते हैं उसका 90 प्रतिशत तक हम लोग सीखते हैं। यानि अब जो विद्यार्थी स्कूल की पढ़ाई के बाद तकनीकी शिक्षा की ओर अग्रसर हुए हैं यहां थोड़ा परिवर्तन है। यहां जो लैबोरेटरी हैं वह बहुत ही प्रोफेशन और महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विश्वविद्यालय की आशा रहेगी कि सभी विद्यार्थी सीखने और जानने वाले हों। उन्होंने पेस्सिव और एक्टिव लर्निंग के बारे में बात करते हुए कहा कि शिक्षक पढ़ा रहा हैं और आप सुन रहे हैं यह पेसिव लर्निंग है। एक्टिव लर्निंग वह होती है आप क्लास में सीख रहे हैं और उसके बारे डिस्कशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पास अभी न तो भविश्य है और न ही भूत। अभी वर्तमान आपसके साथ है। इसलिए वर्तमान में सफलता हासिल कर भविष्य की ओर अग्रसर हों।

जीएलए के अल्यूमनस एवं इसरो के डायरेक्टर कमलेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि कोई भी विद्यार्थी अगर यह सोचकर पढ़ाई में जुट जाये कि उसे रोजगार पाने की वजाय उसे रोजगार देने वाला बनना है, तो यकीन मानिएगा कि वह रोजगार देने वाला ही बनेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अनुभव साझा किए और कहा कि यह सही है कि आइआइटी, एमएनआईटी में उत्कृष्ट प्रोफेसर हैं, लेकिन जीएलए का विद्यार्थी भी अगर शिक्षक द्वारा दिखाई जा रही राह चल पड़ा तो वह भी आइआइटी के छात्र के बराबर वाली कुर्सी पर बैठेगा। यह वह विश्वास के साथ कह सकते हैं।

जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में स्नातक स्तर पर- बी.टेक, बी.फाॅर्मा, बीएससी, बायोटेक, बीए, बीकाॅम, बीए और बीकाॅम एलएलबी ऑनर्स, डिप्लोमा इन फाॅर्मेसी, स्नातकोत्तर स्तर पर एम.फाॅर्मा (फार्मोकोलाॅजी एण्ड फार्मास्यूटिक्स) सहित आदि कोर्सों के नव-प्रवेशित छात्र-छात्राओं ने ओरिएंटेशन में शिरकत की।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रो. आशीष शर्मा, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के डीन प्रो. अशोक भंसाली, मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो. अतुल बंसल, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डाॅ. हिमांशु शर्मा, डीन प्रो. आनंद सिंह जलाल, प्रबंधन संकाय निदेशक प्रो. अनुराग सिंह, इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनय देवलिया ने भी विश्वविद्यालय के शिक्षण सत्र के बारे में छात्रों को जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. दिव्या गुप्ता ने किया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी दीपक गौड़, सह-प्रशासनिक अधिकारी धर्मेन्द्र कुलश्रेष्ठ एवं विभिन्न पदाधिकारियों का सहयोग सराहनीय रहा।

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