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जीएलए के मैकेनिकल विभाग में आयोजित विश्वस्तरीय सम्मेलन में जुटे शिक्षाविद और रिसर्चर

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने फेडरल यूनिवर्सिटी रिओ ग्रान्डी दोसुल पोर्टो अलेग्रे ब्राजील के साथ मिलकर दो दिवसीय स्कोपस इंडेक्स इंटरनेशनल कॉफ्रेंस आइसीएमएमई 2023 आस्पेक्ट ऑफ मेटेरियल्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय संस्करण का सफल आयोजन किया। सम्मेलन की शुरुआत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. पियूष सिंघल ने मुख्य अतिथि प्रो. रंगन बनर्जी एवं विशिष्ट अतिथियों का परिचय करते हुए स्वागत किया।

कार्यक्रम के कन्वेनर डा. सुजीत कुमार वर्मा, डा. अनड्रेस जेबलोस मेंडीबुरू एवं डा. प्रदीप कुमार सिंह ने सम्मेलन का विषय प्रस्तुत करते हुए बताया कि सम्मेलन में देश एवं विदेश के ब्राजील चिल्ली, लिथुआनिया, स्वीडेन सऊदी अरबिया से लगभग 385 रिसर्च पेपर प्राप्त हुए, जिनमें से सिर्फ 260 पेपर्स को ही उत्कृष्ट पाया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में मैकेनिकल मैटेरियल्स के आर्थिक और सतत विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रो. बनर्जी ने अपने भाषण में यह सुझाव दिया कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ मुद्दों को कैसे हल किया जाय। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रत्येक क्षेत्र में नवीन खोजों के प्रति जागरूक रहने को आगाह किया। विशिष्ठ अतिथि हिंदुस्तान एरोनोटिक्स के चीफ मैनेजर फरेन्द्र सिंह चौहान ने एयरक्राफ्ट रिलायबिलिटी, स्पेस और राकेट ट्रेक्नोलॉजी पर आधारित विभिन्न परियोजनाओं को प्रदर्शित किया।

विशिष्ठ अतिथि इंट्रार्क बिल्डिंग प्रोडक्ट्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर नवाज मल्लिकाकल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों जैसे उन्नत सामग्री विज्ञान इंजीनियरिंग, स्मार्ट विनिर्माण में प्रगति और औद्योगिक रोबोटिक्स में उनके अनुप्रयोगों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग अनुसंधान और विकास पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मेक्ट्रोनिक्स और रोबोटिक्स, विनिर्माण प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीकी चुनौतियों को दूर करने के लिए नवीन सामग्रियों, नई रणनीतियों और नवाचार पर बल देते हुए कहा कि नवाचार हमारे देश के विकास के लिए बहुउपयोगी साबित हो सकते हैं। क्योंकि भारत सरकार आज भी नवाचार के लिए तमाम संसाधन उपलब्ध करा रही है। छात्र-छात्रा अगर चाहें तो वह ऐसे आईडिया तैयार करें, जो देश के विकास में सहायक सिद्ध हों उन्हें विश्वविद्यालय स्तर पर स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से प्रोटोटाइप के तौर पर बदल सकते हैं।

यूनिचर्म इंडिया कंपनी मैनेजिंग डायरेक्टर विजय चौधरी ने कहा कि दुनियां इंजीनियरिंग, डॉक्टर, शोधार्थियों और विद्धानों से समाधान ढूंढ रही है। क्योंकि अधिक से अधिक समस्याओं का समाधान भी इन्हीं के पास है। इंजीनियर वह व्यक्ति है, जो हर समय ग्राहकों की संतुष्टि के लिए नयी-नयी तकनीकों का इजाद करता है। नयी तकनीकी इजाद के समय इंजीनियर को यह भी देखना होता है कि कोई उत्पाद ऐसा न हो जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायी साबित हो।

कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता ने एस्पेक्टस ऑफ मैटेरियल्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग पर विद्यार्थियों से रूबरू होते हुए कहा कि इंजीनियरिंग मैटेरियल साइंस के अंतर्गत आता है, इसके अंदर हम उन सभी मैटेरियल के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। ऐसी जानकारी नजदीक से शिक्षाविद और रिसर्चरों के माध्यम से प्राप्त करने के लिए ही विश्वस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन से मिला ज्ञान विद्यार्थियों के लिए क्लासरूम की शिक्षा के कहीं अलग हटकर तभी लाभप्रद होगा, जब वह इस ज्ञान को एक नए अनुसंधान के तौर पर उकेरेंगे।

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