नई दिल्ली : ईरान और इजराइल के बीच शुरू हुई जंग का असर भारत के तेल, व्यापार, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध और बढ़ता है तो होर्मुज स्ट्रेट बंद हो सकता है। इससे भारत को हर महीने होने वाली तेल सप्लाई का आधा हिस्सा खतरे में पड़ जाएगा।
इसके अलावा भारत का नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है। इसका 10% से ज्यादा हिस्सा इस क्षेत्र से सप्लाई होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंग बढ़ने से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है और इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ेगा।
ऐसे हालात में बाजार में बड़ी बिकवाली और गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, जब दुनिया में तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर जाते हैं। ऐसे समय में लोग सोना और चांदी खरीदना पसंद करते हैं। इसलिए इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।
भारत के लिए इतना अहम क्यों होर्मुज स्ट्रेट ?
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत को हर महीने मिलने वाली तेल सप्लाई का करीब 50% इसी रूट से आता है। अगर इजराइल ईरान के तेल ठिकानों पर हमला करता है या ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह बंद हो जाएगी।
भारत के 10% नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी संकट
सिर्फ तेल ही नहीं, भारत का व्यापार भी ईरान और इजराइल के युद्ध से संकट में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही जाता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, ताजे फल, सब्जियां और इंजीनियरिंग सामान भी शामिल हैं। पश्चिम एशिया के देशों (GCC देशों) को होने वाला ज्यादातर एक्सपोर्ट इसी रूट से होता है। रूट बंद होने या माल ढुलाई महंगी होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ जाएगी और ग्लोबल मार्केट में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा।
भारत ने हाल ही में उन खाड़ी देशों को करीब 47.6 बिलियन डॉलर का नॉन-ऑयल सामान एक्सपोर्ट किया है, जिनका व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े समुद्री रास्तों पर निर्भर है। यह भारत के टोटल 360.2 बिलियन डॉलर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का करीब 13.2% हिस्सा है। ये आंकड़े बताते हैं कि अगर इन रास्तों से होने वाली सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो भारत के व्यापार पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है।
होर्मुज रूट से सबसे ज्यादा सामान UAE को एक्सपोर्ट करता है भारत
| देश | एक्सपोर्ट वैल्यू (बिलियन डॉलर) |
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | 28.5 |
| सऊदी अरब | 11.7 |
| इराक | 2.8 |
| कुवैत | 2.1 |
| कतर | 1.7 |
| ईरान | 1.2 |
क्रूड की कीमतें बढ़ने से गिर सकता है भारतीय शेयर बाजार
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल हमेशा से एक सेंसिटिव फैक्टर रहा है। अगर ईरान-इजराइल तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो भारत के शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी जा सकती है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2.87% बढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं।
पेंट, टायर, एविएशन और लॉजिस्टिक जैसे सेक्टर, जो कच्चे तेल पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) पहले से ही भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, ऐसे में यह युद्ध जियो-पॉलिटिकल टेंशन को और तेज कर सकता है।
सोने-चांदी की कीमतों में भी उछाल आ सकता है
अनिश्चितता दौर में निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते सोने-चांदी की कीमतें नई ऊंचाई को छू सकती हैं।
अगर अमेरिका इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो डॉलर के मुकाबले सोने की मांग और बढ़ेगी। चांदी की इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट डिमांड दोनों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे यह आने वाले समय में निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न का जरिया बन सकता है।

