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Fri. Feb 13th, 2026

सीजेआई चन्द्रचूड बोले…राजस्थान पूरे देश की न्यायपालिका के लिए बदलाव का चेहरा

जयपुर : देश के प्रधान न्यायाधीश डॉ. डी वाई चन्द्रचूड ने कहा कि राजस्थान पूरे देश की न्यायपालिका के लिए बदलाव का चेहरा है। यहां 1344 न्यायिक अधिकारियों में से 562 महिला हैं, 2021-22 में 120 पदों पर 71 महिलाओं का चयन हुआ। ऐसा बदलाव पूरे देश में होना चाहिए। सूचना का अधिकार को लेकर ब्यावर में हुए आंदोलन से प्रभावित होकर कहा कि पारदर्शिता के लिए स्थानीय स्तर पर आंदोलन हुआ और हम जानेंगे, हम जीएंगे नारे से बड़ा बदलाव सामने हैं।

सीजेआई चन्द्रचूड ने राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के प्लेटिनम जुबली वर्ष के शुभारम्भ के लिए आयोजित समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के पांच अन्य न्यायाधीश व राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए जी मसीह की मौजूदगी में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित प्रधानपीठ और जयपुर पीठ के साथ ही जयपुर की कॉमर्शियल कोर्ट में पेपरलैस व्यवस्था तथा हाईकोर्ट के टेलीग्राम चैनल की लॉन्चिंग की गई। राजस्थान हाईकोर्ट के प्लेटिनम जुबली वर्ष में प्रवेश पर सत्य की जय हो.. लोगो व मोटो (ध्येय) तथा हाईकोर्ट में अब तक रहे न्यायाधीशों के चित्रों की डिजीटल गैलरी को भी लॉन्च किया गया।

समारोह में सीजेआई चन्द्रचूड ने कहा कि ब्यावर में आरटीआई के लिए आंदोलन हुआ, जिसका उद्देश्य था जानने का अधिकार मिले जो जीने के अधिकार का हिस्सा है। इसका सीजेआई के रूप में मुझ पर प्रभाव हुआ और इस पहल का सुप्रीम कोर्ट पर भी असर हुआ। इस आंदोलन के कारण देश में कानून बना। इसी तरह राजस्थान में महिला न्यायिक अधिकारी बढ़ रही हैं, इससे यहा की न्यायपालिका का चेहरा बदल रहा है। इससे महिला शिक्षा की महत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं।

सीजेआई ने उदाहरण् दिया कि जब सुप्रीम कोर्ट में लिफ्टमैन से पूछा कि बच्चे क्या करते हैं तो उसने कहा बेटी सीए है और बेटा कंप्यूटर इंजीनियर। इसी तरह ड्राइवर से पूछा कि बच्चों को क्या बनाओगे तो जवाब मिला बेटी को डॉक्टर बनाउंगा। यह बात साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों के बारे में पुरानी सेाच को वक्त के साथ बदलना होगा।

सीजेआई चन्द्रचूड ने कोविड के दौरान आए बदलाव का हवाला देकर कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने वीसी के जरिए सुनवाई कर देशभर में उदाहरण पेश किया। यहां जोधपुर व जयपुर में बैठे न्यायाधीशों ने वीसी के जरिए खंडपीठ में सुनवाई, जो क्लासिकल एक्जाम्पल है। इसके विपरीत कई अन्य हाईकोर्ट में वीसी से सुनवाई के लिए तीन दिन पहले सूचना देनी होती है। वीसी की सुविधा से पारदर्शिता बढ़ती है और वकीलों के साथ पक्षकारों को भी सहुलियत होती है। राजस्थान में हाईकोर्ट और लॉअर कोर्ट में आईटी सहित आधारभूत सुविधाओं में आए बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान की ज्यूडिशियरी में चेंज आया है, अन्य राज्यों को भी इससे सीखना चाहिए।

चन्द्रचूड ने हाईकोर्ट में वकील कोटे से केवल दो महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति होने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि वकालत के पेशे में महिलाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि वकील से न्यायाधीश बनते हैं। उन्होंने इस दौरान समाज की उस सोच पर भी प्रहार किया, जिसमें कहा जाता है महिला है क्या करेगी। उन्होंने कहा, बदलाव को सहर्ष स्वीकार किया जाना चाहिए।

सीजेआई ने अधीनस्थ न्यायपालिका को लेकर कहा, यह शब्द बदलना चाहिए, इससे अधीनस्थ होने का भाव प्रदर्शित होता है। इसे डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी कहा जाना चाहिए, क्योंकि न्यायपालिका की नस (रक्तवाहिनी) है। इसमें शामिल युवा जजेज भारत को बदलेंगे। कहने पर जोर दिया और कहा कि इसमें यंग जजेज दिखते हैं।

समाराेह में सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश संजय किशन कौल, सूर्यकांत, एस रविन्द्र भट्‌ट, बेला एम त्रिवेदी, पंकज मित्तल, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए जी मसीह ने भी न्यायपालिका में आए बदलाव और आम आदमी की आवश्यकताओं को लेकर अपने विचार रखे।

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