दैनिक उजाला, मथुरा : जनपद मथुरा में करोड़ों रुपये की योजनाओं के बाद भी बिजली व्यवस्था बेहाल है। उपभोक्ता 32-32 घंटे की कटौती झेलने को मजबूर हुए हैं। भीषण गर्मी में हालात ऐसे हैं कि हर रोज़ कहीं न कहीं विद्युत घरों का घेराव हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागज़ी निरीक्षण दिखाकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
बिजनेस प्लान के कार्य (130 करोड़ रुपये)
वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के बिजनेस प्लान के अंतर्गत कुल 1574 कार्यों पर 130 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमेंः-
- 04 विद्युत उपकेंद्र निर्माण (40 एमवीए क्षमता)- 28 करोड़ रुपये
- 27 उपकेंद्रों की क्षमतावृद्धि (130 एमवीए)- 15 करोड़ रुपये
- 287 लाइनें (33 व 11 केवी)- 44 करोड़ रुपये
- 1199 वितरण परिवर्तक क्षमता वृद्धि/नवीन स्थापना- 38 करोड़ रुपये
- 57 एलटी तंत्र सुधार और सुरक्षा कार्य- 5 करोड़ रुपये
आरडीएसएस योजना के कार्य (233 करोड़ रुपये)
- जनपद में लाइन हानियों को कम करने के लिए 233 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए।
17 कृषि पोषक (323 सर्किट किमी)- 27 करोड़ रुपये - 3152 सर्किट किमी एबी केबलिंग/आर्मर्ड केबलिंग- 206 करोड़ रुपये
ये कार्य मथुरा शहर, नंदगांव, छाता, चौमुंहा, गोवर्धन, राया, बलदेव, फरह, नौहझील और मांट में किए गए। लेकिन हर जगह स्थिति बद से बदतर ही रही।
बलदेव क्षेत्र की सबसे खराब हालत
सबसे अधिक बिगड़ी स्थिति बलदेव क्षेत्र की है। यहां हर दिन फॉल्ट, लंबे समय तक सप्लाई बाधित और वोल्टेज समस्या ने उपभोक्ताओं की रात की नींद हराम कर रखी है।
स्थानीयांं का आरोप है कि लाख कोशिशों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी, एक्शियन, एसई देहात और चीफ इंजीनियर ने औचक निरीक्षण तक करने की जहमत नहीं उठाई।
नेताओं ने उठाई आवाज़
किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष ठाकुर नरेश पाल सिंह जसावत
उन्होंने कहा कि “यह सरकार और बिजली विभाग की घोर लापरवाही है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी उपभोक्ता अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल रही। उद्योग-धंधे चौपट हैं और अधिकारी सिर्फ फाइलों में काम दिखा रहे हैं। कांग्रेस मांग करती है कि इन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो और जिम्मेदार अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।”
समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड बलदेव ब्लॉक अध्यक्ष सौरभ
उन्होंने कहा “बलदेव की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां करोड़ों के कार्य सिर्फ कागजों में हुए हैं। जनता रोज़ बिजली के संकट से जूझ रही है। सरकार और विभाग जनता को मूर्ख बना रहे हैं। यदि हालात ऐसे ही रहे तो समाजवादी पार्टी युवाओं और उपभोक्ताओं के साथ बड़ा आंदोलन करेगी।”
अधिकारियों का पक्ष
एक्शियन गौरव कुमार का कहना है कि-
“क्षेत्र में जहां भी सुधार कार्य हुए, वहां थर्ड पार्टी कंपनी अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कराया गया। इसके बाद जेई और एसडीओ की संस्तुति पर ही कार्यों को फाइनल किया गया।”
एसई देहात विजय मोहन खेड़ा का कहना है कि- प्रत्येक क्षेत्र के निरीक्षण के लिए जेई और एसडीओ की जिम्मेदारी है। हम भी गए हैं, ऐसे याद नहीं है कि कहां कहां निरीक्षण किया है। हालांकि अभी मैं मीटिंग में हूं।
एसई सिटी आरपी सिंह जांच पर बोलने से कतराते नजर आए। आखिरी में उन्होंने अपने आपको मीटिंग में व्यस्त होना बताया।
लेकिन सवाल उठता है कि अगर निरीक्षण सही हुआ, तो फिर हर जगह बिजली संकट क्यों है?
निष्कर्ष
363 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद मथुरा की बिजली व्यवस्था ध्वस्त है। उपभोक्ता गर्मी में बेहाल हैं, किसान और छात्र परेशान हैं। नेताओं ने भी इसे लेकर आवाज उठाई है, लेकिन उच्चाधिकारियों की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है।
एसई देहात, शहरी और चीफ नहीं चाहते बेहतर व्यवस्था?
363 करोड़ रूपये सरकार ने विद्युत अव्यवस्थाओं को बेहतर व्यवस्थाओं में बदलने के लिए जारी किए। बावजूद इसके एक भी उच्चाधिकारी एसई देहात, शहरी और चीफ इंजीनियर तक ने ये जहमत तक नहीं उठाई कि विद्युत व्यवस्था इतने करोड़ खर्च होने के बाद भी बदतर क्यों है। क्षेत्रीय लोग क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं। आखिर इतने फॉल्ट की शिकायत क्यों आ रही हैं। लेकिन नहीं एक बार भी किसी अधिकारी ने क्षेत्रों का जमीनी स्तर पर उतरकर लोगों से हालातों को जानने की सोची तक नहीं है। यही नहीं फोन तक अटेंड करना मुनासिब नहीं समझा।
करोड़ों खर्च, लेकिन हालात जस के तस
बिजनेस प्लान के तहत लगभग 130 करोड़ रुपये खर्च हुए।
आरडीएसएस योजना में 233 करोड़ रुपये लगाए गए।
दावा किया गया कि नई लाइनें बिछाई गईं, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई, एबी केबलिंग और कृषि पोषक लाइनें तैयार की गईं। लेकिन हकीकत यह है कि इन सभी योजनाओं का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।
दैनिक उजाला लाइव विचार
पिछले दो वर्ष से जिले की विद्युत अव्यवस्था को लेकर दैनिक उजाला लाइव ने अपने न्यूज पोर्टल के माध्यम से कईयों बार अधिकारियों तक उपभोक्ताअें की समस्याओं को पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार एसई से लेकर चीफ इंजीनियर तक ने दरकिनार कर दिया। अब भी अगर स्थितियों को समय रहते परख लिया जाय तो भी अधिक सुधार की संभावनाएं हैं। जगह अवैध कनेक्शन, जहां ट्रांसफार्मर पर लोड है, वहां वृद्धि की जाय, तो शायद फॉल्ट और वोल्टेज की समस्या खत्म हो। जहां तार झूल रहे हैं, वहां सही किये जायें। अक्सर कई क्षेत्रों में खंभों पर मिनी बिजलीघर सजे हुए हैं, उन्हें खत्म किया जाय। जहां आरडीएसएस में भी केबल बदली नहीं गईं वहां केबल कन्वर्जन कार्य हो तो बहुत अधिक सुधार की आज भी संभावनाएं हैं।

