दैनिक उजाला, मनोरंजन डेस्क : भारतीय संगीत जगत आज गहरे शोक में डूबा हुआ है। जब भी भारतीय संगीत के स्वर्णिम इतिहास के पन्ने पलटे जाएंगे, एक नाम सदा सबसे उज्ज्वल अक्षरों में लिखा जाएगा — आशा भोंसले। सुरों की वह साम्राज्ञी, जिनकी आवाज़ ने दशकों तक करोड़ों दिलों की भावनाओं को स्वर दिए, अब इस संसार को अलविदा कह चुकी हैं। 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, और इसी के साथ भारतीय संगीत का एक अमूल्य, स्वर्णिम और भावनात्मक अध्याय सदा के लिए समाप्त हो गया।
भारतीय सिनेमा की सबसे बहुमुखी, लोकप्रिय और कालजयी गायिकाओं में शुमार आशा भोंसले ने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके परिवार ने इस दुःखद समाचार की पुष्टि की। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई और संगीत प्रेमियों की आंखें नम हो उठीं।
8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोंसले भारतीय संगीत की उस अनुपम धरोहर थीं, जिन्होंने अपने स्वर से हर पीढ़ी को मंत्रमुग्ध किया। वे महान संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर की पुत्री तथा सुप्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं।
बहुत कम उम्र में ही उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रखा और संघर्षों से भरे जीवन के बावजूद अपनी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण के बल पर भारतीय संगीत के शिखर तक पहुँचीं। सात दशकों से अधिक लंबे अपने अद्वितीय करियर में आशा भोंसले ने केवल गीत नहीं गाए, बल्कि हर शब्द में भावनाएं, हर सुर में जीवन और हर धुन में आत्मा भर दी। उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, मलयालम सहित 20 भाषाओं में 12,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए और अपने नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज कराया।
उनकी आवाज़ में रोमांस था, दर्द था, शरारत थी, भक्ति थी और हर वह भावना थी जो सीधे दिल को छू जाए। ‘रंगीला रे’, ‘किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने’, ‘तन्हा-तन्हा यहाँ पे जीना’, ‘ओ मेरे सोना रे, ‘पिया तू अब तो आजा, ‘ये मेरा दिल’ और ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ जैसे अनगिनत गीत आज भी संगीत प्रेमियों की धड़कनों में बसते हैं।
अपने प्रशंसकों के बीच ‘आशा ताई’ के नाम से प्रसिद्ध आशा भोंसले को उनके अतुलनीय योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, इत्यादि कई फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं थीं — वे करोड़ों भारतीयों की यादों, भावनाओं और जीवन के अनगिनत पलों की आवाज़ थीं। उनकी मधुरता में प्रेम था, उनकी तान में पीड़ा थी, उनकी ग़ज़लों में आत्मा थी और उनके गीतों में जीवन की धड़कन।
आज जब उनकी आवाज़ सदा के लिए मौन हो गई है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो संगीत स्वयं शोक में डूब गया हो। उनके जाने से केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक स्वर्णिम युग विदा हुआ है।
“कुछ आवाज़ें शरीर छोड़ देती हैं, पर संसार नहीं… आशा जी उन्हीं अमर स्वरों में से एक थीं।“
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