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‘कट्टर मूर्खों की परवाह मत कीजिए’, चैंपियन ट्रॉफी में ‘रोजा विवाद’ पर भड़के जावेद अख्तर, शमी को दी सलाह

  • मोहम्मद शमी के रोजा न रख पाने को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच जावेद अख्तर भी भड़क गए हैं

दैनिक उजाला, मनोरंजन डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम अब चैंपियन्स ट्रॉफी अपने नाम करने से बस एक कदम दूर है। रविवार यानी कल न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम फाइनल मुकाबला खेलेगी। फाइनल मुकाबले में अहम भूमिका निभाने वाले गेंदबाज मोहम्मद शमी बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में हैं। कुछ मौलानाओं ने मोहम्मद शमी को रोजा न रख पाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी जिसका काफी विरोध हुआ था। अब शमी के बचाव में जावेद अख्तर भी कूद पड़े हैं। इतना ही नहीं जावेद अख्तर ने कट्टरपंथियों पर भड़कते हुए कहा कि ‘शमी साहब आप चिंता मत करिए और कट्टरपंथी मूर्खों की परवाह मत करिए। आप हमें और पूरे देश को गौरवान्वित करिए।’

बता दें कि बीते दिनों भारतीय टीम जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबला खेल रही थी तो उस दौरान शमी को ग्राउंड पर पानी पीते देखा गया था। इसका वीडियो वायरल हुआ और कुछ लोगों ने रमजान के दिनों में शमी को रोजा न रखने को लेकर निशाने पर ले लिया। ये मामला केवल फैन्स और सोशल मीडिया यूजर्स तक ही नहीं रुका बल्कि इस्लाम के ही कुछ मौलानाओं ने आकर इसे गलत बताया। इसके बाद ये बहस छिड़ गई कि क्रिकेट मैच के बीच मोहम्मद शमी का रोजा रखना कितना जरूरी है। इसको लेकर लोगों ने शमी को रोजा न रखने की भी सलाह दी थी। वहीं कुछ कट्टरपंथियों ने शमी को ट्रोल करने की कोशिश की थी। अब जावेद अख्तर ने भी इसको लेकर शमी का बचाव करते हुए एक पोस्ट शेयर किया है। जिसमें जावेद अख्तर लिखते हैं, ‘शमी साहब, आप कट्टर मूर्खों की परवाह मत कीजिए, जिन्हें भी आपके पानी पीने से परेशानी है उन्हें इससे कुछ लेना-देना नहीं होना चाहिए। आप हमारी गौरवान्वित भारतीय टीम के सितारे हैं और मेरी फाइनल मुकाबले के लिए आपको शुभकामनाएं हैं।’

हरभजन समेत बचाव में कूदे कई दिग्गज

वहीं मोहम्मद शमी को रोजा न रख पाने के लिए कुछ कट्टरपंथियों ने ट्रोल करना शुरू किया तो बचाव में भी लोग कूदने लगे। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी शमी का बचाव करते हुए कहा था कि मुकाबलों के दौरान ऐसा जरूरी नहीं है कि आपको रोजा रखना ही चाहिए। हरभजन सिंह ने कहा था, ‘आप घर पर बैठे हैं इसलिए ऐसा सोच रहे हैं। लेकिन मेरी व्यक्तिगत राय ये है कि खेलों को धर्म से ऊपर उठकर देखना चाहिए। ये देश की बात है और यहां हम अपने लक्ष्य पर ध्यान लगाते हैं।’

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