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सूर साधना स्थली पर सूरदास चरित्र का भव्य नाट्य मंचन

  • उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सूर जयंती महोत्सव में सूर वार्ता, महाकवि के जीवन के प्रसंगों का वर्णन

गोवर्धन : “सूरदास चरित्र नाट्य मंचन” के साथ ही उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किए गए ‘महाकवि सूरदास जयंती महोत्सव’ का समापन हो गया।
ये मंचन सूर साधना स्थली परासौली (गोवर्धन) के ओपन एयर थिएटर (मुक्ताकाशीय रंगमंच) में दो दिवसीय सूरदास जयंती महोत्सव के अंतर्गत हुआ। महोत्सव में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन तथा सूर श्याम सेवा संस्थान, परासोली (गोवर्धन) का सहयोग रहा।

पुष्टिमार्गीय श्रीकृष्ण लीला संस्थान ट्रस्ट वृंदावन के कलाकारों ने स्वामी वेद प्रकाश भारद्वाज के निर्देशन में “सूरदास चरित्र नाट्य मंचन” किया। इसमें सूरदास जी के प्रारंभिक जीवन से लेकर अंत तक की उनकी साधना के तमाम प्रसंगों का बहुत प्रभावी मंचन किया।

नाट्य मंचन में सूरदास जी के बालपन की भूमिका सीताराम भारद्वाज ने और वृद्ध सूरदास जी की भूमिका जय गोपाल भारद्वाज ने निभाई । श्रीनाथजी के रुप मे ज्ञान भारद्वाज की भूमिका रही जबकि महाप्रभु बल्लभाचार्य के रूप में घनश्याम भारद्वाज ने अपनी भूमिका निभाई। वेदराम भारद्वाज वैष्णव बै। अकबर की भूमिका में गोविंद जी रहे। संगीतकार मोहन श्याम ने पखावज पर संगति दी। भुवनेश्वर वशिष्ठ ने सूरदास जी पद सुनाए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

नाट्य मंचन के मौके पर संत सियाराम बाबा, संत साबरिया बाबा, संत कन्हैया बाबा, प. दीन बंधु त्यागी जी महाराज और बल्लभ संप्रदाय के लाल जी गोकुल वालों के अलावा उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के डिप्टी सीईओ पंकज वर्मा, सहायक अभियंता आर पी सिंह यादव आदि ने मंच पर श्रीनाथ जी की आरती उतारी।

गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार और सूर श्याम सेवा संस्थान के प्रबंधक देवेन्द्र शर्मा ने संतजनों को पटुका पहना कर उनका स्वागत किया। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चंद्र शर्मा और गीता शोध संस्थान की शोध समन्वयक डा रश्मि वर्मा आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।

सूरदास चरित्र मंचन से पूर्व भागवताचार्य श्री पूर्ण प्रकाश कौशिक जी ने ओपन एयर थिएटर (मुक्ताकाशीय) मंच पर “सूर वार्ता” के क्रम में सूरदास जी जीवन के तमाम प्रसंगों का संगीतमय वर्णन किया। उन्होंने अपनी सुमधुर वाणी में सूरदास जी के पदों का गायन भी किया। दोनों ही कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे। अंत में गिरिराज जी की आरती उतारी गयी।

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