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जीएलए यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा के प्रोफेसरों ने किया ईवी चार्जिंग स्टेशन के निर्धारण पर शोध

  • जीएलए यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों के रिसर्च से ईवी वाहन स्वामियों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ

दैनिक उजाला, ग्रेटर नोएडा : वर्तमान समय में ईवी चार्जिंग स्टेशनों पर वाहन की बैट्री को चार्ज होने में अधिक समय व्यतीत हो रहा और समय के अनुसार खर्च भी अधिक है। चार्जिंग के समय की बचत और कम खर्चे को लेकर जीएलए विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा कैंपस के प्रोफेसरों ने एक आधुनिक रिसर्च किया है।

‘नवीकरणीय उत्सापदन के साथ ईवी चार्जिंग स्टेशन का इष्टम निर्धारण‘ विषय पर आधारित शोध आइईईई ट्रांजेक्शन ऑन इंडस्ट्री एप्लीकेशन एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के माध्यम से अपने सुझाव देते हुए जीएलए विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा कैंपस के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्राणदा प्रशांता गुप्ता तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. हिमांशु शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय ईवी वाहनों का है। पेट्रोल और डीजल वाहनों पर हर व्यक्ति कम फोकस कर रहा है। समयानुसार बढ़ते ईवी की चार्जिंग का एक अह्म मुद्दा यात्रा के दौरान दिमाग में आता है कि लंबे रूट पर कितने समय और कितने रूपए में एक वाहन की बैट्री चार्ज हो जायेगी। इसी चार्जिंग व्यवस्था को लेकर यह शोध धरातल पर उतरने के बाद मील का पत्थर साबित होगा।

आर्थिक और तकनीकी सुधार भी देखने को मिलेगा

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में करीब डेढ़-दो घंटे में ईवी स्टेशनों पर वाहन की बैट्री चार्ज होती है। ऐसे में समय के अनुसार पैसा भी अधिक लगता है यानि समयानुसार यूनिट अधिक बनेंगी। शोध पत्र में लाइन आउटेज और नेटवर्क हानियों पर विचार करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ एकीकृत इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों की समय-सारणी को अनुकूलित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। परिचालन लागत को कम करने के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशनों की बेहतर समय-सारणी तय होगी। शोध में लाइन आउटेज डिस्ट्रीब्यूशन फैक्टर्स (एलओडीएफ) जैसी उन्नत अनुकूलन तकनीकों का उपयोग करके कम्प्यूटेशनल बोझ को कम करने पर फोकस किया गया है। साथ ही विद्युत प्रणाली की विश्वसनीयता और लागत बचत में आर्थिक और तकनीकी सुधार भी देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस शोध में रिसर्चर वैजू कलखंबकर, निकिता कुमारी, जयश्री समई अवती का सहयोग सराहनीय रहा है।

कैंपस के प्रतिकुलपति प्रो दिवाकर भारद्वाज ने कहा…

जीएलए विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा कैंपस के प्रोफेसरों के बेहतर रिसर्च पब्लिश होने पर कैंपस के प्रतिकुलपति प्रो दिवाकर भारद्वाज ने कहा कि यह शोध भारत के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में सहायता करना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम रहेगी। विद्युत ग्रिड में सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। नीति निर्माताओं और कंपनियों को लागत प्रभावी और कुशल ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे को लागू करने में सहायता मिलेगी।

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