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धरती के केंद्र में ऐसी अवस्था में रहता है पानी, जानकारी नहीं है तो जान लें…

क्या कभी आपने सोचा है कि धरती के केंद्र में पानी किस अवस्था में रहता होगा। आप में से कुछ कहेंगे ठोस, कुछ कहेंगे तरल तो कुछ कहेंगे कि धरती का केंद्र काफी गर्म होने से हो सकता है कि पानी यहां गैस के रुप में रहता होगा। शायद आप इन तीन अवस्था के बारे में ही कहेंगे। कारण, अब तक आपको पानी की तीन अवस्था के बारे में ही बताया गया है। मगर, अब पानी की चौथी अवस्था के बारे में भी पता कर लिया गया है। ठोस, तरह और गैस के बाद पानी की इस चौथी अवस्था को सुपरयोनिक अवस्था कहा गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हैरान करने वाले अवस्था काले रंग की है, जो बेहद गर्म है।

हाल ही में वैज्ञानिकों ने दो हीरों के बीच पानी की एक बूंद को जोर से दबाया। उस पर दुनिया के सबसे ताकतवर लेजर से ब्लास्ट किया गया। परिणाम में पानी की चौथी अवस्था सामने आई। यह गर्म और काले रंग का था। पानी धरती के केंद्र में इसी दबाव और तापमान में रहता है। इससे पहले वैज्ञानिकों ने शॉक वेव के जरिए 20 नैनोसेकेंड के लिए ऐसी अवस्था हासिल की थी।
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के जियोफिजिसिस्ट और आर्गोन नेशनल लेबोरेटरी के एंडवांस्ड फोटोन सोर्स में बीमलाइन साइंटिस्ट विटाली प्राकपेनका ने बताया कि हमारे लिए पानी की यह नई अवस्था हैरान करने वाली थी। ये धरती के केंद्र में बेहद दबाव वाले क्षेत्र में मिलती है. वहां तापमान भी बहुत ज्यादा है. ऐसे में किसी को भी पानी की यह अवस्था देखने को नहीं मिलती।
विटाली ने बताया कि पानी का एक अणु दो हाइड्रोजन और एक आक्सीजन के परमाणु से मिलकर बनता है। पानी की अलग-अलग अवस्थाओं को में मालीक्यूल अलग-अलग अरेंजमेंट दर्शाते हैं। अब तक वैज्ञानिकों ने पानी की 20 अवस्थाओं को खोजा है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अणु अलग-अलग तापमान और दबाव में विभिन्न तरह की अवस्थाओं का निर्माण करते हैं. जैसे आइस-6 और आइस-7 के मॉलीक्यूल खुद को आयताकार प्रिज्म या क्यूब जैसा आकार बनाते हैं। आइस-11 को इलेक्ट्रिक फील्ड में रखने पर अपने मॉलीक्यूल्स को फ्लिप कर देता है। आइस-21 में ऑक्सीजन के कण बिगड़ जाते हैं, जबकि हाइड्रोजन के कण अपने रेगुलर फॉर्म में रहते हैं।
अत्यधिक गर्म और बेहद दबाव में बना सुपरियोनिक आइस पानी की 18वीं अवस्था है। यह पानी की बाकी अवस्थाओं की तुलना में सबसे ज्यादा विचित्र है। इसमें ऑक्सीजन का अणु ठोस रुप में खुद को एक जगह पर लॉक कर लेते हैं। जबकि, हाइड्रोजन के एटम अपने इलेक्ट्रॉन्स को छोड़कर आयन में बदल जाते हैं। यह अवस्था आधी तरल और आधी बर्फ की रहती है। विटाली ने कहा कि यहां पर हाइड्रोजन के एटम किसी समुद्र की लहरों की तरह तैरते रहते हैं। जबकि ऑक्सीजन के एटम एक जगह पर टिके रहते हैं। इस उपलब्धि से अब स्टेट ऑफ मैटर की स्टडी के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों को नया रास्ता मिल गया है। –सीनियर पत्रकार योगेश जादौन की फेसबुक वॉल से- 17.11.2021

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