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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका ने हमारा इस्तेमाल किया:मतलब निकलने पर टॉयलेट पेपर की तरह फेंका; साथ देने की कीमत आज भी चुका रहे

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को संसद में कहा कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकलने के बाद उसे टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया। पाकिस्तान रक्षा मंत्री ने कहा,

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हमने अफगानिस्तान में दो जंग लड़ीं। इसमें इस्लाम और मजहब के नाम पर हिस्सा लिया, लेकिन असल में दो सैन्य तानाशाहों (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ) ने वैश्विक ताकत का समर्थन पाने के लिए ऐसा किया।QuoteImage

उन्होंने 1979 में सोवियत संघ के हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम अफगान सरकार के न्योते पर उठाया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे सीधा हमला बताकर अपनी तरह से नरेटिव तैयार किया।

आसिफ ने पाकिस्तान की अमेरिका के साथ 1999 के बाद हुई नई रणनीतिक साझेदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका के साथ खड़े होने की कीमत पाकिस्तान आज भी चुका रहा है।

आसिफ बोले- पाकिस्तान ने इतिहास से सबक नहीं सीखा

आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ने इतिहास से सबक नहीं सीखा और अपने छोटे फायदे के लिए कभी अमेरिका, कभी रूस और कभी ब्रिटेन की ओर झुकता रहा। उन्होंने कहा कि अब इन देशों का यहां पहले से ज्यादा प्रभाव है, जो 30-40 साल पहले नहीं था।

उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान का आतंकी इतिहास रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान की दो जंगों में शामिल होना पाकिस्तान की बड़ी भूल थी और आज देश में जो आतंकवाद है, वह उन्हीं गलतियों का नतीजा है।

आसिफ बोले- जंग को सही ठहराने के लिए एजुकेशन सिस्टम में बदलाव किए

आसिफ ने कहा कि हम अपने इतिहास और गलतियों को स्वीकार नहीं करते। आज का आतंकवाद उन्हीं डिक्टेटरों की गलतियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि इन जंगो को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान की एजुकेशन सिस्टम में जानबूझकर बदलाव किए गए। उनके मुताबिक, यह बदलाव आज भी सिस्टम में मौजूद हैं।

आसिफ ने बिल क्लिंटन के दौरे का जिक्र किया

उन्होंने साल 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की इस्लामाबाद की कुछ घंटों की यात्रा का जिक्र किया। क्लिंटन भारत दौरे के बाद थोड़े समय के लिए पाकिस्तान आए थे।

आसिफ ने कहा कि इससे साफ दिखता है कि दोनों देशों का रिश्ता सिर्फ मतलब तक सीमित हो गया था। उस समय अमेरिका ने सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ पर लोकतंत्र, परमाणु प्रसार और आतंकवाद को लेकर दबाव डाला था।

2000 में पाकिस्तान का प्रधानमंत्री कोई नहीं था, क्योंकि उस समय देश में सैन्य शासन चल रहा था। नवंबर 1997 से अक्टूबर 1999 तक नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे।

12 अक्टूबर 1999 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट करके नवाज शरीफ की सरकार को हटा दिया और खुद चीफ एक्जीक्यूटिव बन गए। 1999 के बाद से 2002 तक पाकिस्तान में कोई निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं था।

मुशर्रफ ने सत्ता संभाली और 2002 में चुनाव करवाए, जिसके बाद जफरुल्लाह खान जमाली प्रधानमंत्री बने।

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