जयपुर : राजस्थान में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करौली के बाद आज बाड़मेर आ रहे हैं। पीएम मोदी जनसभा को संबोधित कर केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे। बाड़मेर से पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह जसोल की पीएम मोदी की रैली से पहले भाजपा में वापसी हो गई है। जिससे रविंद्र सिंह भाटी की मुश्किल बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि मानवेंद्र सिंह की भाजपा में वापसी होने से बाड़मेर-जैसलमेर के चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव होगा।
बाड़मेर जैसलमेर लोकसभा सीट से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। इसके बाद बाड़मेर जैसलमेर लोकसभा सीट से भाजपा के राजपूत प्रत्याशी नहीं उतारे जाने से राजपूत वोटर्स भाजपा से नाराज चल रहा था। ऐसे में रविंद्र सिंह भाटी के निर्दलीय ताल ठोकने से राजपूत समाज का वोट बैंक उनके साथ जाता नजर आ रहा है।
बता दें कि मारवाड़ की राजनीति में जसोल परिवार का खासा प्रभाव देखा जाता है। 2018 में जसोल परिवार की नाराजगी के भाजपा को मारवाड़ में बड़ा नुकसान हुआ था। ऐसे में राजपूत समाज को साधने के लिए भाजपा ने मानवेंद्र सिंह जसोल की पीएम मोदी की रैली से पहले वापसी करवा दी है।
जसवंत सिंह जसोल अटल बिहारी वाजपेई सरकार में वित्त विदेश और रक्षा मंत्री रहे हैं। मानवेंद्र सिंह भाजपा के संस्थापक सदस्य में शामिल जसवंत सिंह जसोल के बेटे हैं। मानवेंद्र सिंह जसोल ने 1999, 2004 और 2009 में भाजपा की टिकट पर बाड़मेर जैसलमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और 2004 में जीतकर सांसद बने और फिर भाजपा की टिकट पर 2013 में शिव विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने थे।
2018 में कर्नल मानवेंद्र सिंह ने पचपदरा में बड़ी स्वाभिमान सभा का आयोजन कर ‘कमल का फूल हमारी भूल’ बोलकर भाजपा छोड़ने का ऐलान किया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने मानवेंद्र सिंह जसोल को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने झालरापाटन से विधानसभा चुनाव लड़ाया था लेकिन मानवेंद्र सिंह यह चुनाव हार गए।
2019 में कांग्रेस ने उन्हें बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से टिकट दिया था लेकिन इस चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा के कैलाश चौधरी से चुनाव हार गए। इसके बाद कांग्रेस की गहलोत सरकार में सैनिक कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाते हुए राज्य मंत्री का दर्जा दिया था और 2023 के विधानसभा चुनाव में बाड़मेर की सिवाना सीट टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन यह चुनाव भी जीतने में कामयाब नहीं हो पाए।

