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Thu. Feb 12th, 2026

1 जनवरी को जा रहे वैष्णो देवी, तो जान लीजिए दर्शन से जुड़े नए नियम, नहीं तो होगी दिक्कत

  • वैष्णो देवी माता के दरबार में लोगों को दर्शन में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो, इसको लेकर नियमों में बदलाव किया गया है

दैनिक उजाला, जम्मू : नए साल की शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग माता वैष्णो देवी के दरबार में दर्शन के लिए जाते हैं। यदि आप भी 1 जनवरी को वैष्णो देवी के लिए यात्रा कर रहे हैं तो माता के दरबार में दर्शन से जुड़े नए नियम भी जान लीजिए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की उम्मीद को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने यात्रा और दर्शन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। 

तत्काल प्रभाव से लागू हुए नए नियम

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य ट्रैक पर भीड़ को नियंत्रित करना, भगदड़ की आशंका को कम करना और विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों के लिए सुरक्षित व सुगम दर्शन सुनिश्चित करना है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जारी निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। 

RFID यात्रा कार्ड प्राप्त करना अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, अब प्रत्येक श्रद्धालु के लिए यात्रा पंजीकरण के साथ-साथ RFID यात्रा कार्ड प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह एक आधुनिक तकनीक पर आधारित स्मार्ट कार्ड है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक से काम करता है। 

24 घंटों के अंदर यात्रा पूरी कर बेस कैंप में लौटना होगा

श्राइन बोर्ड के अनुसार, श्रद्धालुओं को RFID यात्रा कार्ड प्राप्त होने के 12 घंटों के अंदर अपनी यात्रा शुरू करनी होगी और 24 घंटों के अंदर यात्रा पूरी करके बेस कैंप कटरा लौटना अनिवार्य है। पहले RFID कार्ड की वैधता केवल यात्रा शुरू करने तक ही सीमित थी, लेकिन अब पहली बार यात्रा पूरी करने की समय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है, जिससे भीड़ प्रबंधन में और सुधार होगा।

जमा हो जाती थी भारी भीड़

श्राइन बोर्ड प्रशासन ने बताया कि नए साल को लेकर श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर बार नए साल से तीन-चार दिन पहले कटरा और भवन क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अत्यधिक भीड़भाड़ और भगदड़ जैसी स्थितियों से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

अब दर्शन का इंतजार होगा कम

श्राइन बोर्ड का कहना है कि ये नियम श्रद्धालुओं को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए लागू किए गए हैं। इससे दर्शन का इंतजार कम होगा और यात्रा सुचारु रूप से पूरी हो सकेगी।

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