फरीदाबाद : दिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद जिले की अल फलाह यूनिवर्सिटी में माहौल पूरी तरह से बदल चुका है। ब्लास्ट से पहले क्लास रैगुलर चल रही थी, लेकिन अब यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स क्लास कम ले रहे हैं और मेडिकल स्टाफ और स्टूडेंट्स अपने घर की ओर रवाना हो रहे हैं। गांव धौज में यूनिवर्सिटी बनी होने के कारण लोगों में भी भय का माहौल बना हुआ है, लगातार पुलिस टीमें अपनी जांच में जुटी हुई हैं।
वहीं पुलिस की ओर से डबल लेयर वेरिफिकेशन शुरू कर दी गई है, स्टूडेंट्स और स्टाफ सभी की वेरिफिकेशन की जा रही है।
10 नवंबर को दिल्ली ब्लास्ट के बाद फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी जांच एजेंसी के रडार पर है। स्टूडेंट्स के अनुसार कश्मीरी डॉ. क्लास लेने के लिए नहीं आ रहे हैं। रोजाना स्टाफ और बच्चे घर की तरफ रवाना हो रहे हैं। रोजाना जांच एजेंसियों के आने-जाने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा नुकसान MBBS फाइनल ईयर के छात्रों को हो रहा है। छात्रों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर उनकी रैंक पर पड़ने वाला है।

अल फलाह यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट।
अल फलाह में रचा आतंक का षड़यंत्र
यूनिवर्सिटी के अंदर डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन, डॉ. उमर नबी अपने नेटवर्क के साथ आंतक की साजिश रच रहे थे। डॉ. उमर ने अपने आपको दिल्ली ब्लास्ट में उड़ा लिया, जबकि अन्य जांच एजेंसियों की गिरफ्त में हैं। इनके अलावा जांच एजेंसियों ने इनके सपंर्क में रहने वाले दूसरे डॉक्टरों और छात्रों को भी हिरासत में लिया हुआ है।
जांच एजेंसियों ने इनके सपंर्क में रहने वाले मस्जिद के इमाम, छात्रों सहित अस्पताल में काम करने वाले दर्जनों कर्मचारियों को भी हिरासत में ले रखा है।
बाहरी व्यक्ति की यूनिवर्सिटी में नहीं एंट्री
यूनिवर्सिटी के अंदर से लगातार हो रही गिरफ्तारियों और कसते शिकंजे को लेकर पढ़ाई करने वाले छात्र डरे हुए हैं। कैंपस में पहले रहने वाले टीचरों और छात्रों की चहलकदमी पुरी तरह से गायब हो चुकी है। छात्र अब अधिकतर अपना समय अपने कैमरों में बिता रहे हैं। यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से केवल अस्पताल में आने वाले मरीजों को आने-जाने की इजाजत दी जा रही है। बाकी किसी बाहरी या अनजान शख्स को गेट से अंदर नही जाने दिया जा रहा है।
कश्मीरी प्रोफेसरों ने की क्लास बंद
MBBS के एक छात्र ने बताया कि उसका चौथा साल चल रहा है। पहले जैसी क्लास नहीं लग रही है। खास-तौर से जम्मू-कश्मीर से जो डॉ. प्रोफेसर यहां पर क्लास लेते थे, अब वो क्लास नहीं ले रहे हैं। ब्लास्ट के बाद से ही पहले तो उन्होंने क्लास में कम समय देना शुरू किया, लेकिन अब पूरी तरह से क्लास बंद की हुई है। जिसके कारण कुछ ही प्रोफेसर उनकी क्लास में आ रहे हैं। जिसके कारण उनका अधिकतर समय हॉस्टल के कमरे में ही बीत रहा है।

यूनिवसिर्टी कैंपस से बाहर जाती गाड़ी को चेक करते गार्ड।
5 दिनों से मरीजों को एडमिट करना बंद
यूनिवर्सिटी के अंदर अस्पताल चल रहा है ब्लास्ट से पहले यहां पर रोजाना 500 से अधिक के करीब ओपीडी आ रही थी और मरीजों को भी एडमिट किया जा रहा था। लेकिन एकाएक अब पिछले 5 दिनों से मरीजों को एडमिट करना बंद कर दिया गया है, जो कुछ लोग दिखाने के लिए आ रहे हैं, केवल उनको दवाई देकर वापस भेजा जा रहा है। इसके कारण अपनी इंटर्नशिप कर एमबीबीएस के छात्र भी अस्पताल नहीं आ रहे है।
हॉस्टल में गार्ड की संख्या बढ़ाई
हास्टल में सुरक्षा को लेकर गार्ड की संख्या बढ़ा दी गई है। जहां पहले हास्टल के हर फ्लोर एक गार्ड रहता था, वहां पर अब दो की तैनाती कर दी गई है। हास्टल से बाहर जाते समय लिखित रूप से रीजन देना पड़ रहा है और वापस में छात्रों के द्वारा साथ में लाए गए सामान की चैकिंग की जाती है। छात्रों के परिवार का कोई अगर मिलने के लिए आ रहा है, तो उसको हास्टल में आने की इजाजत नहीं है।

