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अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चैयरमेन 14 दिन की न्यायिक हिरासत में: मनी लॉन्ड्रिंग के दूसरे केस में गिरफ्तार किया था

  • 45 करोड़ की जमीन 75 लाख में खरीदी

फरीदाबाद : फरीदाबाद में आंतक का सेंटर पॉइंट बनी अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली की एक कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ईडी ने उनको PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत 45 करोड़ रूपए की जमीन के अधिग्रहण के दूसरे मामले में 24 मार्च को गिरफ्तार किया था।

शनिवार को एंजेसी के द्वारा सिद्दीकी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के समक्ष पेश किया गया, जहां उनकी ईडी द्वारा 25 मार्च को दी गई 10 दिवसीय हिरासत समाप्त हो गई। अब उन्हें 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

45 करोड़ की जमीन 75 लाख में खरीदी

ईडी की जांच मे सामने आया है कि दिल्ली के मदनपुर खादर गांव में ‘खसरा नंबर 792’ में स्थित विवादित 1.14 एकड़ जमीन को अल-फलाह ग्रुप ने केवल 75 लाख रूपए में खरीदी हुई दिखाया गया। जबकि एंजेसी के मुताबिक उसकी कीमत 45 करोड़ रूपए है।

फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए

24 मार्च को, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपने दूसरे मामले में सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। उनकी जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल जमीन के धोखाधड़ीपूर्ण अधिग्रहण के लिए किया गया, और तारबिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक और बहुसंख्यक शेयरधारक सिद्दीकी ने कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया।

415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की

इससे पहले मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी को 18 नवंबर 2025 में PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने इस मामले में लगभग 260 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया था। जवाद अहमद सिद्दीकी ने झूठी मान्यता और पहचान के दावे कर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को धोखे में रखा। इस तरह 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की। इस फंड को निजी कामों में इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने पास के गांव के एक कमरे से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की थी।

पुलिस ने पास के गांव के एक कमरे से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की थी।

यूनिवर्सिटी के डाक्टर ब्लास्ट में रहे शामिल

10 नवंबर को हुए लाल किले के विस्फोट में 15 लोगों की मौत के मामले से जुड़े “व्हाइट-कॉलर टेरर” की जांच में भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के दायरे में आ गया था।

बता दें कि, दिल्ली लाल किला ब्लास्ट से पहले पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल शकील को गिरफ्तार किया था। जिसकी निशानदेही पर पुलिस ने पास के गांव के एक कमरे से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री को बरामद किया था।

दिल्ली ब्लास्ट के बाद इसी यूनिवर्सिटी की मेडिकल प्रोफेसर डॉ. शाहीन सईद को भी गिरफ्तार किया गया। जबकि इनके साथ डॉ. उमरी नबी ने खुद को दिल्ली में ब्लास्ट के दौरान बम से उड़ा लिया था। जिसके बाद इस यूनिवर्सिटी के सीधे तार आंतक से जुड़े थे।

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