फरीदाबाद : दिल्ली ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच एजेंसियों के रडार पर है। यहां के एक पूर्व नर्सिंग स्टाफ ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में रोजाना 100 से 150 तक मरीजों की फर्जी फाइलें तैयार की जाती थीं।
यह काम आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ. मुजम्मिल शकील और सुसाइड बॉम्बर बने डॉ. उमर नबी के निर्देश पर होता था। जो कर्मचारी इन आदेशों का पालन नहीं करते थे, उन्हें ऐबसेंट दिखाकर सैलरी काट दी जाती थी।
कर्मचारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी में हिंदू स्टाफ के साथ भेदभाव किया जाता था। रात की ड्यूटी में शामिल कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और कुछ डॉक्टर अक्सर पाकिस्तान की तारीफ करते थे। कई बार पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे तक लगा देते थे।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन सईद कई बार डॉ. मुजम्मिल के साथ एनआईटी मार्केट से विस्फोटक और संदिग्ध सामान खरीदने जाती थी। जांच एजेंसियां अब इनके मूवमेंट, खरीदे गए सामान और संपर्कों की गहराई से जांच कर रही हैं।

फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों जांच के दायरे में है। – फाइल फोटो
राजस्थान के रहने वाले लक्ष्मण ने साल 2025 में 14 जुलाई को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में जॉइन किया था। लेकिन 25 अक्तूबर को उसने नौकरी छोड़ दी। वह यहां पर नर्सिंग स्टाफ में काम करता था। मेडिकल कॉलेज में उसकी ड्यूटी अस्पताल के आईसीयू में होती थी। लक्ष्मण ने भास्कर से बातचीत में कई खुलासे किए हैं…
फंडिंग के लिए बनाते थे फाइल:
इन फाइलों का उपयोग बाहर से गरीबों के इलाज के नाम पर फंड एकत्रित करने के लिए किया जाता था। रोजाना 100 से लेकर 150 तक फाइलों को तैयार किया जाता था। अगर कोई कर्मचारी फाइलें बनाने से मना करता था तो किसी की सैलरी होल्ड कर दी जाती थी। लेकिन कश्मीरियों के साथ ऐसा नहीं किया जाता।
नकली फाइल बनाने का टारगेट:
रात के समय काम करने वाले स्टाफ से नकली फाइलें तैयार कराई जाती थी। हर कर्मचारी को 5 फाइल तैयार करने का टारगेट दिया जाता था। इन नकली फाइलों पर डॉक्टर के साइन पहले से ही होते थे।
फाइलों में दवाइयों का रिकॉर्ड होता था:
फाइल में केवल उनको मेडिकल चार्ट नोट्स बनाने होते थे। इन फाइलों में उन दवाइयों का रिकॉर्ड बनाया जाता, जो यूज ही नहीं होती थी। इन फाइलों को सुबह होते ही डॉक्टर अपने साथ ले जाते थे। फाइलों का क्या यूज होता था किसी भी स्टाफ के कर्मचारी को इसके बारे में नहीं बताया जाता था।
मुस्लिम स्टाफ को 80 किलो राशन मिलता था
लक्ष्मण के अनुसार अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में 200 लोगों का नर्सिंग स्टाफ है। करीब 80 फीसदी मुस्लिम और 20 फीसदी हिंदू कर्मचारी हैं। इनमें भी 35 फीसदी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर कश्मीर से आते हैं।
प्रबंधन हिन्दू कर्मचारियों के साथ भेदभाव करता है। दिवाली पर उनको एक मिठाई का डिब्बा तक नहीं दिया जाता था। लेकिन मुस्लिम स्टाफ को रोजे के दौरान 80 किलो राशन मुफ्त में दिया जाता है।
पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी
लक्ष्मण ने दावा किया है कि रात के समय जो कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। वे अक्सर अपनी बातों में पाकिस्तान की तारीफ करते हुए नजर आते थे। कई बार एक दूसरे के साथ वह हंसी-मजाक करते हुए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे।
हर रोज कश्मीर को लेकर कुछ न कुछ चर्चा होती रहती थी। कश्मीरी स्टाफ आरोप लगाते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सेना उनके भाइयों पर जुल्म करती है। सेना कश्मीरियों को स्पेशल टारगेट बनाती है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के पेरेंट्स ने हरियाणा के हेल्थ मिनिस्टर को लेटर लिखा।
अभिभावकों ने सरकार से हाई लेवल कमेटी बनाने की मांग की
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट के पेरेंट्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, शिक्षा मंत्री, हरियाणा सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर, NMC को लेटर लिखा है। इसमें मामले को लेकर एक हाई लेवल कमेटी का गठन करने की मांग की गई है।
पेरेंट्स का कहना है कि कमेटी के अंदर स्वास्थ्य विभाग, NMC सहित दूसरे विशेषज्ञ और अभिभावकों को शामिल किया जाए। कमेटी यह सुनिश्चित करे कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई, प्रैक्टिस, इंटर्नशिप, रजिस्ट्रेशन पर किसी प्रकार का कोई खतरा न आए। क्योंकि अभी तक उन्हें केवल मौखिक रूप से आश्वासन दिया जा रहा है।
पेरेंट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी का आतंकवाद में नाम आने के बाद हर कोई उनके बच्चों को शक की नजर देख रहा है। ऐसे में उनके बच्चों को आगे परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनके बच्चे डर के साये में न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं, न ही रातों को सो पा रहे हैं।
एक अभिभावक ने बताया कि उनके साथ 360 से अधिक अभिभावक आपस में जुड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश, यूपी, बिहार, पंजाब, दिल्ली और एनसीआर के हैं। सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में हैं।

