करनाल : हरियाणा के करनाल में मां-बेटी ने हाथ बांधकर नहर में छलांग लगा दी। दोनों को डूबते देख वहां खड़े कुछ युवक भी उन्हें बचाने के लिए नहर में कूद गए। किसी तरह दोनों को पानी से बाहर निकाला गया। इसके बाद मामले की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम नंबर डायल 112 पर दी। सूचना मिलते ही पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची।
मां की हालत ज्यादा नाजुक होने के चलते उसे वहां से सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। जबकि बेटी की हालत मौके पर ही ठीक होने के चलते उसे वहां से थाने ले जाया गया।
पुलिस मामले की आगामी कार्रवाई कर रही है। वहीं, युवती ने यह भी बताया कि चौरा गांव में उसके भाई की हत्या कर दी गई थी। जिसके आरोपी अभी भी पुलिस पकड़ से बाहर है।
भाई के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए शासन और प्रशासन का दरवाजा खटखटाया, लेकिन न्याय न मिलने पर उन्होंने ऐसा कदम उठाया है।

नहर में मां बेटी को बाहर निकालते राहगीर।

एम्बुलेंस में बाली देवी को लेकर जाते परिजन।

इलाज के लिए बाली देवी को अस्पताल लेकर पहुंचे परिजन।
- दूध लेने गया था नाबालिग, फिर मिला शव: 29 जून की रात को चौरा गांव में 16 वर्षीय शुभम की हत्या कर दी गई थी। शुभम दूध लेने गांव की डेयरी गया था, लेकिन वह वापस घर नहीं लौटा। रात करीब साढ़े 8 बजे ग्रामीणों ने उसकी मां को सूचना दी कि शुभम एक सुनसान गली में पड़ा है। जब बाली देवी मौके पर पहुंची तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा संकरी गली में मृत पड़ा है। शुभम के गले पर चोट के निशान थे और उसकी हत्या गला दबाकर की गई थी। प्राइवेट पार्ट पर भी चोट के निशान थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी सामने आया कि पांच-छह लोगों ने मिलकर हत्या की थी।
- पूर्व सरपंच और एक अन्य पर आरोप: मां बाली देवी ने गांव के ही पूर्व सरपंच राजेंद्र खुराना उर्फ बिल्ला और राजेंद्र तोमर पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि 1 साल पहले उनकी बेटी से छेड़छाड़ के मामले में उन्होंने घरौंडा थाने में राजेंद्र के खिलाफ शिकायत दी थी। तब से आरोपी उनके बेटे से रंजिश रखे हुए थे और खुलेआम धमकी दे चुके थे कि शुभम की हत्या कर देंगे। 2 जुलाई को पुलिस ने तीन लोगों से पूछताछ की थी, लेकिन कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगे। इसके बाद से अब तक जांच में कोई प्रगति नहीं हुई।
- पति-देवर की मौत के बाद अकेले संभाला परिवार: बाली देवी के पति की 8 साल पहले मौत हो चुकी है। इससे पहले उनके देवर और जेठ का भी निधन हो गया था। इसके बाद वह अपने मामा के घर आ गई थी और सफाई का काम करके बेटे-बेटी का पालन-पोषण कर रही थी। परिजनों का कहना है कि 4 महीने गुजरने के बाद भी पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। इस कारण उनका भरोसा टूटता जा रहा था। बीते दिनों बाली देवी ने अपने परिजनों के साथ जिला सचिवालय में प्रदर्शन भी किया था।

अपने बेटे की फोटो को लेकर जिला सचिवालय में बैठी मां की फाइल फोटो।
बहन के घर से लौटते ही पहुंची नहर, लगाई छलांग
पुलिस प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि मां का नाम बाली देवी है। जोकि अपनी 18 वर्षीय बेटी के साथ अपनी बहन के घर तरावड़ी गई हुई थी। वहां से आने के बाद दोनों पश्चिमी यमुना नहर पहुंची। यहां दोनों ने हाथ बांधे और नहर में छलांग लगा दी।
4 महीने बाद भी न्याय की उम्मीद अधूरी
ट्रॉमा सेंटर में पहुंचे ग्रामीण संजय भाटिया का कहना है कि बाली देवी अपने बेटे की मौत के कारण परेशान चल रही थी। वह मुख्यमंत्री तक के पास गई कि उसको न्याय दिलाया जाए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि पोस्टमॉर्टम में भी मर्डर की बात सामने आई थी। अब तक कुछ नहीं हुआ।

