रायसेन : रायसेन के दशहरा मैदान में शनिवार (11 अप्रैल) से तीन दिवसीय राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। शनिवार दोपहर पहले दिन 12:30 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
महोत्सव में देशभर से आए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, ड्रोन और उन्नत पशुपालन की जानकारी दी जा रही है। वर्तमान में 300 से अधिक स्टॉलों वाली इस प्रदर्शनी में कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने 4 जिलों के लिए रोडमैप घोषित करने की बात कही है, वहीं रक्षा मंत्री ने सेना की छावनियों में स्थानीय जैविक फल-सब्जियां मंगाने का ऐलान किया है।
कुर्सी पर बोझ बनकर बैठने का कोई फायदा नहीं: शिवराज
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि, “रायसेन में सबसे बड़ा शिवलिंग भोजपुर में स्थापित है। भीम बैठका और सांची यहां है। खेती किस प्रकार से आय का साधन बने। इस पर लगातार काम कर रहे हैं। हर राज्य का रोड मैप अलग-अलग बन रहा है। वैज्ञानिकों ने मप्र के चार जिले रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास को लेकर रोडमैप बनाया है। कल दोपहर 1 बजे यहीं पर घोषित होगा। इसमें कौन से इलाके में कौन सी फसल हो सकती है… यह बताया जाएगा। बाग लगाना है तो कौन से पौधे आपके यहां की माटी के लिए हैं, यह भी इसमें होगा।”
उन्होंने आगे कहा, “एक एकड़, दो एकड़ में खेती कर कैसे आय को बढ़ा सकते हैं, यह भी आपको यहां बताया जाएगा। एक एकड़ में किसान कैसे दो लाख साल कमा सकता है, यह भी आपको बताया जाएगा। बीज से लेकर बाजार तक, मिट्टी परीक्षण तक सब यहां आपके लिए है। राम लाल ने एक बोरी डाली तो श्याम लाल भी एक बोरी खाद डाल देता है। आपकी खेत की मिट्टी के लिए कितनी जरूरत है, यहां आई मशीन आपको बताएगी। खेत में लेकर घूमते ही आपको पूरी जानकारी मशीन दे देगी।”
शिवराज ने कहा, “किसानों की जिंदगी बदल पाऊं तो कृषि मंत्री रहने का फायदा है, नहीं तो कुर्सी पर बोझ बनकर बैठने का क्या फायदा। एक जमाना है, जब पिद्दी-पिद्दी देश हमें डराते थे। प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने कहा- हम किसी को छेड़ेंगे नहीं, किसी ने छेड़ा तो छोड़ेंगे नहीं। इसी क्षेत्र ने मुझे एक दर्जन चुनाव जिता दिए। विधायक और सांसद बनाया।”

वैज्ञानिकों ने मप्र के चार जिले रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास को लेकर रोडमैप बनाया है- शिवराज।
सेनाओं की कैंटीन में श्री अन्न और छावनी में जैविक सब्जियां: राजनाथ
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि, “एक किसान पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चलाता है। अर्थव्यवस्था तीन हिस्सों में बंटी होती है। पहला- कृषि और पशुपालन। दूसरा- उद्योग। तीसरा- बैंकिंग, फैक्ट्री-दुकान, इंटरनेट, स्कूल जैसी सेवाएं आती हैं। किसान की मेहतन पूरी व्यवस्था की शुरुआत है। किसान उस आधार की तरह है, जिस पर यह पूरी चेन तेजी से चलती है। कोई भी क्षेत्र हो, किसान की जमीन में ही सबकी जड़ें गड़ी हैं। यही सच्चाई है। युवा इस कृषि क्षेत्र से जुड़ें। खेती को स्मार्ट बनाया जा सकता है। इसके लिए आज कई तकनीकी मौजूद है। कृषि क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। खेती आने वाले समय में गर्व का विषय बने, यहीं हमारी सरकार का संकल्प है।”
उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री ने हमेशा कहा है किसान हमारे देश की रीढ है। यह सिर्फ कहने की बात नहीं है। बीते सालों के पन्ने पलटेंगे तो आपको यह सब दिखेगा। हमारी सरकार ने किसानों के लिए बहुत काम किया है। हर साल किसानों के खाते में केंद्र सरकार 6 हजार डाल रही है। यह सिस्टम हमारी सरकार ने बनाया कि दिल्ली से निकला पैसा सीधे किसान के खाते में पहुंचे। पहले की सरकारों में ऐसा नहीं होता था। जो पैसा सरकार आपको दे रही है, यह कोई उपहार नहीं आपकी मेहनत का पैसा है। यह आपके खाद-बीज खरीदने के लिए है। आंधी-बारिश, ओले, कीड़े… यानी कुदरती आफत से पहले यदि फसल खराब होती थी, तो किसान के सामने कोई रास्ता नहीं होता था। अब आपके पास फसल बीमा है। सरकार ने आपको एक कार्ड दिया है। उससे अब आप अपनी जमीन की स्थिति जान सकते हैं। आपको पता चलता है कि आपकी जमीन को क्या चाहिए, इससे उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है।”
‘पहले कच्चे रास्ते थे, ट्रक नहीं पहुंच पाते थे’
सिंह ने कहा, “किसानों के लिए हर घर तक बिजली, पानी और सड़क की व्यवस्था की। कई जगह पहले कच्चे रास्ते थे, ट्रक नहीं पहुंच पाते थे। अब ऐसा नहीं है। खेतों तक बिजली आने से किसान आसानी से सिंचाई कर सकता है। मंडी को लेकर अब ऑनलाइन सिस्टम है। किसान घर बैठे अपनी फसल कहां बेचना है यह देख सकता है। अभी जितना बदलाव आया है, पर्याप्त नहीं है। अभी इसमें बहुत काम की जरूरत है। इसके लिए पैसा आड़े नहीं आएगा। आपके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने आगे बताया, “कई वर्षाें से राजनीतिक जीवन में हूं। कई पदों पर रहा। एक समय मैं कृषि मंत्री रहा। रक्षामंत्री होते हुए भी मेरे भीतर का किसान जीवित है। यही प्रयास रहा कि किसानों के लिए कैसे कुछ कर पाऊं। आमतौर पर रक्षामंत्री को सेनाओं और देश की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। कृषि से उसका क्या ताल्लुक। यह सही सोच भी है। देशभर में सेना के कैंटोनमेंट इलाके हैं। इन छावनी में जवान अपने परिवार के साथ रहते हैं। इन छावनी में रक्षा मंत्रायल ने एक पहल शुरू की है। पहले सेना के जवानों के लिए बाहर से फल, सब्जी और अनाज आता था। ट्रकों में भरकर सब्जियां आती थीं, ऐसे में खाने की ताजगी, खत्म हो जाती थी। अब हमने तय किया है कि छावनी के पास वाले इलाके से ही जैविक फल-सब्जी मंगवाई जाएगी, बाहर से इसे नहीं लाया जाएगा। आप जो जैविक खेती करेंगे, वह सीधे हमारे जवानों के थाली तक पहुंचेगा। किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए हमने सेनाओं में श्री अन्न के आटे को बढ़ावा दिया है। यानी ज्वार, बाजरा, रागी के आटों को सेनाओं के केंटीन में भी रखना शुरू किया है। छावनी वाले इलाकों में किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है।”

प्रदर्शनी में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कृषि यंत्रों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का सीधा प्रदर्शन किया जाएगा।
3 हैंगरों में बंटा आयोजन स्थल, 300 से अधिक स्टॉल लगे
11 से 13 अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन में देशभर से किसान, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। महोत्सव से एक दिन पहले शुक्रवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन कर स्टॉलों का निरीक्षण किया था। इस विशाल प्रदर्शनी में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जो कृषि, बागवानी, सिंचाई, उर्वरक और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
आयोजन स्थल को 3 बड़े हैंगरों में बांटा गया है। पहले हैंगर में कृषि यंत्र, सिंचाई और नवाचार के स्टॉल हैं। दूसरे हैंगर में पशुपालन, डेयरी, सहकारी संस्थाएं और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं, जबकि तीसरे हैंगर में मुख्य समारोह, तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री शिवराज ने फीता काटकर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।
उन्नत नस्ल की गाय-बकरियां और ड्रोन तकनीक का लाइव प्रदर्शन
महोत्सव में आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का सीधा प्रदर्शन किया जा रहा है। आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, नाबार्ड, नेफेड सहित कई प्रमुख संस्थान और स्टार्टअप भाग ले रहे हैं। तीनों दिन किसानों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, स्टार्टअप प्रेजेंटेशन और वैज्ञानिकों से सीधा संवाद आयोजित किया जाएगा।
पशुपालन को विशेष प्राथमिकता देते हुए यहां गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों के साथ जमुनापारी, सिरोही और बारबरी नस्ल की बकरियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। कड़कनाथ मुर्गी पालन के मॉडल भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। साथ ही मत्स्य पालन के क्षेत्र में बायोफ्लॉक, आरएएस और एक्वापोनिक्स जैसे आधुनिक मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अलावा पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण और पोषण प्रबंधन पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

