रीवा : रीवा के संजय गांधी अस्पताल के गायनी वार्ड में रविवार दोपहर करीब 1 बजे आग लग गई। आग ऑपरेशन थिएटर में लगी थी। इस घटना में एक नवजात बच्चा जल गया।
आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इस संवेदनशील घटना को दिनभर छिपाए रखा। परिजनों को उसका शव तक नहीं सौंपा। रात करीब 12 बजे अस्पताल प्रशासन ने नवजात के शव के जलने की पुष्टि की।
मामले में अस्पताल अधीक्षक राहुल मिश्रा ने बताया कि नवजात बच्चा ऑपरेशन के दौरान मृत पैदा हुआ था। उसी समय ओपीडी क्षेत्र में आग लग गई, जिससे पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।
मरीजों को सुरक्षित निकालने की प्राथमिकता में ऑपरेशन थिएटर में रखा नवजात का शव वहीं छूट गया, जो आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया।

आग लगने से ऑपरेशन थिएटर में हड़कंप मच गया।
परिजनों के आरोप, मामला पहुंचा उच्च स्तर तक
जानकारी के मुताबिक, गोविंदगढ़ के गहरा गांव की निवासी कंचन साकेत का ऑपरेशन किया गया था। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश की और बच्चे के शव को चादर में छिपाकर ले जाया गया। जब मामला सामने आया और उच्च स्तर तक पहुंचा, तब देर रात सच्चाई उजागर हुई।
डिप्टी सीएम बोले- नवजात के शव की जानकारी नहीं दी गई
मामले में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें केवल आग लगने की सूचना दी थी। नवजात के शव के जलने की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला को भी बच्चे के जलने की जानकारी नहीं दी गई
खास बात यह है कि संजय गांधी अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं होने की जानकारी डिप्टी सीएम तक को थी। इसके बावजूद समय रहते कोई ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई। इस लापरवाही ने अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को और संदिग्ध बना दिया है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। आग लगने के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल जांच से जिम्मेदारी तय होगी या लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। जानकारी के अनुसार, संजय गांधी अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और गांधी स्मारक अस्पताल इन तीनों के पास फिलहाल फायर एनओसी (NOC) नहीं है। ये तीनों ही अस्पताल नगर निगम के फायर सेफ्टी मानकों को पूरा नहीं करते हैं।

नगर निगम आयुक्त सौरभ सोनवड़े पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि निगम की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कई बार नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन अब तक फायर एनओसी के पैमाने पूरे नहीं किए गए। उनका कहना है कि चेतावनी दी जा चुकी है, इसलिए आगजनी की स्थिति में नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं होगी।




