जोधपुर : विश्वभर में फेमस सांभर झील के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Area) में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट की आड़ में खजराली जंगल और हरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोपों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने प्रकृति सारथी फाउंडेशन और पवन कुमार मोदी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है कि नावां (डीडवाना-कुचामन) और सांभर झील के आसपास के वेटलैंड क्षेत्रों में “यथास्थिति” (Status Quo) बनाए रखी जाए और एक भी पेड़ न काटा जाए।
याचिकाकर्ता का तर्क: विकास के नाम पर विनाश
मामला सांभर झील से सटे नावा गांव और आसपास के वेटलैंड क्षेत्रों से जुड़ा है, जिन्हें बेहद संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र माना जाता है। याचिकाकर्ता ‘प्रकृति सारथी फाउंडेशन’ की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि:
- राजस्व रिकॉर्ड और मास्टर प्लान में दर्ज ‘खजराली जंगल’ (Khajrali forest) को सोलर एनर्जी डवलपमेंट की आड़ में नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
- सरकारी अधिकारियों ने खुद इस क्षेत्र में पेड़ों को बचाने और ‘वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017’ का पालना करने के लिए लगातार पत्राचार किया है, फिर भी जमीनी स्तर पर नियमों की अनदेखी हो रही है।
कोर्ट का आदेश: खसरा नंबर 1174 में नहीं कटेंगे पेड़
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने आदेश दिया कि:
“नावां गांव के खसरा नंबर 1174 और सांभर झील के अन्य वेटलैंड से सटे इलाकों में पेड़ों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए। इस दौरान कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।”
इन कंपनियों और अधिकारियों से मांगा जवाब कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब तलब किया है। जिन पक्षकारों को नोटिस दिया गया है, उनमें शामिल हैं:
सचिव, पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार
ऊर्जा विभाग और वन विभाग सचिव (केंद्र व राज्य)
राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड
मैसर्स एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड
सांभर साल्ट्स लिमिटेड
जिला कलेक्टर (डीडवाना-कुचामन) और तहसीलदार नावां।
नगरपालिका बोर्ड नावां और सीनियर टाउन प्लानर अजमेर

